उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में डीएवी पीजी डिग्री कॉलेज के छात्र उज्ज्वल राणा ने खुद को क्लास के अंदर ही आग लगा ली। बताया जा रहा है कि उसकी 7,000 रुपये फीस नहीं भरी गई थी, जिसके कारण उसे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। छात्र 70% से ज्यादा झुलस गया है। इस मामले को लेकर कॉलेज गेट पर छात्र और ग्रामीण धरने पर बैठे। मंत्री कपिल अग्रवाल और जयंत चौधरी ने ग्रामीणों को मामले की जांच का भरोसा दिया है।
खाकरोबान गांव का रहने वाला उज्ज्वल राणा DAV पीजी कॉलेज बुढ़ाना में बीए सेकेंड ईयर का छात्र है। बता दें कि खुद को आग लगाने के कारण उज्ज्वल राणा गंभीर रूप से झुलस गया और उसे पहले बुढ़ाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, फिर मेरठ के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया। अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की कि उसकी हालत स्थिर है। पुलिस ने प्रिंसिपल के खिलाफ बीएनएस की धारा 351(3) और 352 के तहत मामला दर्ज किया है और सुसाइड नोट में नामजद तीन पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
घटना से पहले भी उज्ज्वल राणा (24) एक वीडियो में कह रहा है कि मैं परीक्षा देने आया था, लेकिन फीस जमा न होने के कारण मेरा फॉर्म लेने से मना कर दिया गया। मैंने सभी से निवेदन किया कि मैं कुछ दिन बाद अपनी फीस जमा कर दूंगा, लेकिन वे इस बात को नहीं माने। उनका कहना था कि अगर तुम्हारे पास पैसे नहीं हैं, तो तुम्हें पढ़ने का कोई अधिकार नहीं है। मैंने उनसे निवेदन किया, लेकिन कोई बात नहीं सुनी और मुझे धक्के देकर ऑफिस से बाहर निकाल दिया।
उज्वल राणा का कहना है कि ऑफिस से जुड़े लोगों ने अपशब्दों का भी प्रयोग किया। सिर्फ मेरे साथ ही नहीं, बल्कि कई छात्रों के साथ यह व्यवहार किया जा रहा है। उज्ज्वल राणा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका साथ देने के बजाय प्रशासन का पक्ष लिया, जिससे उन्हें न्याय और मदद मिलने की उम्मीद खत्म हो गई। उसने नोट में प्रिंसिपल समेत तीन पुलिसकर्मियों को परेशानी के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। उसने वीडियो में कहा है कि मेरी आत्महत्या के जिम्मेदार प्रिंसिपल प्रदीप कुमार सिंह , ASI नंद किशोर, कॉन्स्टेबल हरवीर और विनीत होंगे।
वहीं, इस घटना के बाद अब डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रदीप कुमार सिंह का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। प्रिंसिपल साहब का कहना है कि छात्र ने अपनी फीस के केवल 1,750 रुपये का भुगतान किया है। हम एक सेमेस्टर की आधी फीस जमा करते हैं। इस छात्र ने बाकी का भुगतान नहीं किया है और शायद ही कभी कक्षा में आता है। उसके पास 25,000 रुपये का मोबाइल फोन है और वह रोजाना मोटरसाइकिल से कॉलेज आता है, जिसकी कीमत कम से कम 1 लाख रुपये है। उसे गरीब या दलित पृष्ठभूमि से कैसे माना जा सकता है?
उन्होंने कहा कि यदि वह सच में फीस भरने में असमर्थ है, तो सरकार के पास ऐसे छात्रों के लिए प्रावधान और छात्रवृत्ति की योजनाएं हैं। यदि वह गरीब है, तो उसने छात्रवृत्ति फॉर्म क्यों नहीं भरा?
