प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और कफ सिरप की अवैध तस्करी मामले में देश के अलग-अलग शहरों में 25 ठिकानों पर छापेमारी की। लखनऊ, वाराणसी, रांची, अहमदाबाद, जौनपुर और सहारनपुर में हुई इस छापेमारी में यह एक संगठित और बड़े स्तर पर चल रहे सिंडिकेट का मामला सामने आया है। यहां से ED को 229 फर्जी कंपनियों के दस्तावेज़ मिले हैं।
इसी साल मध्य प्रदेश के गुना, विदिशा में कोडीन सिरप से कई बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई और इस नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल दुबई फरार है, वहीं दूसरे आरोपी अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपियों के पूर्वांचल के बाहुबली नेता धनंजय सिंह और सुशील सिंह के साथ भी कनेक्शन होने की बात सामने आई है। UP STF ने अब 87 FIR और कई गिरफ्तारियां की हैं। वहीं 12 दिसंबर को ED ने 25 ठिकानों पर छापे मारे हैं। वहीं NDPS एक्ट, BNS, मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया गया है।
ED ने जौनपुर में अमर पाण्डेय के दो ठिकानों पर छापेमारी की। अमर पांडेय केदार फार्मा से सम्बंधित बताया जा रहा है। ED की टीम जौनपुर के पचहटिया स्थिति टोयोटा एजेंसी पर भी विजिट किया। कफ सीरप घोटाले से जुड़े कनेक्शन को खंगालने में जुटी हुई है ED की टीम।
ED ने रांची स्थित M/s सैली ट्रेडर्स के कार्यालय से 189 संदिग्ध बोगस कंपनियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में सामने आया है कि इन फर्मों के जरिए करीब 450 करोड़ रुपये का फर्जी टर्नओवर दिखाकर अवैध लेनदेन किए गए। मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के बंद पड़े घर को खोलने पर ED को प्राडा और गुच्ची जैसे महंगे बैग, साथ ही राडो और ऑडेमार्स पिगुएट ब्रांड की घड़ियां मिलीं। इनकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। इसके अलावा घर के इंटीरियर पर 1.5 से 2 करोड़ रुपये नकद खर्च किए जाने के सबूत भी मिले हैं।
लखनऊ में निलंबित सिपाही आलोक प्रताप सिंह के घर पर छापेमारी में सामने आया कि उन्होंने पॉश इलाके में एक महलनुमा मकान बनवाया है। इस मकान की केवल निर्माण लागत ही करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि जमीन की कीमत अलग से तय की जाएगी।
अहमदाबाद में M/s Aarpik Pharmaceuticals Pvt. Ltd. और उसकी सहयोगी कंपनी M/s Idhika Life Sciences के ठिकानों पर तलाशी ली गई। यहां कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध बिक्री, दुरुपयोग और कई करोड़ रुपये के बेहिसाब लेनदेन के सबूत मिले। कंपनी के निदेशकों के दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। ED को चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल के पास से 140 कंपनियों का डेटा मिला है। इन कंपनियों की भूमिका अवैध पैसे को घुमाने यानी फंड लेयरिंग में संदिग्ध मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में विभोर राणा और उसके सहयोगियों की जांच में 125 कंपनियों के जरिए धन के ट्रांसफर और डायवर्जन के सबूत मिले हैं। इन फर्मों के जरिए अवैध पैसे को अलग-अलग खातों में भेजा गया।
