ULC घोटाले में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार करना चाहती थी उद्धव सरकार, DGP रश्मि शुक्ला की SIT रिपोर्ट में खुलासा !

 

महाराष्ट्र की पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला ने अपने रिटायरमेंट से पांच दिन पहले अतिरिक्त मुख्य (गृह) सचिव को खुफिया (SIT) रिपोर्ट सौंपी थी कि मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को उद्धव ठाकरे सरकार गिरफ्तार चाहती थी। रश्मि शुक्ला ने इस खुफिया रिपोर्ट में लिखा है कि जब संजय पांडेय महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक थे, तब उन्होंने उस समय की सरकार के कहने पर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को 2021 के अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में ठाणे के पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार करने को कहा था।

बता दें कि साल 2016 में ठाणे नगर पुलिस थाने में बिल्डर श्यामसुंदर अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था, जो बिल्डर संजय पुनमिया और अग्रवाल के बीच साझेदारी विवाद से जुड़ा था। इस मामले में साल 2017 में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी, इसके बावजूद संजय पांडेय ने मामले की पुनः जांच के आदेश दिए। इसी दौरान संजय पुनमिया ने आरोप लगाया कि 2021 से जून 2024 के बीच पुराने केस की दोबारा जांच के नाम पर उनका उत्पीड़न किया गया और उनसे कथित तौर पर जबरन वसूली (Extortion) की मांग की गई। इस शिकायत के आधार पर संजय पांडेय सहित सात लोगों के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम को विधान परिषद सदस्य प्रविण दरेकर ने विधानमंडल में उठाया था। इसके बाद सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन DGP रश्मि शुक्ला को सौंपी, जिसे रश्मि शुक्ला ने राज्य सरकार को भेज दिया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संजय पुनमिया द्वारा प्रस्तुत ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कालीना स्थित फॉरेंसिक लैब में कराई गई। जांच में ठाणे पुलिस के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त सरदार पाटिल, पूर्व नगर रचनाकार दिलीप घेवारे और संजय पुनमिया के बीच हुई बातचीत की पुष्टि हुई है। कथित बातचीत में सरदार पाटिल यह कहते सुनाई देते हैं कि संजय पांडे ने उनसे और पुलिस निरीक्षक मनोहर पाटिल से पूछा था कि देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक यह साजिश साल 2021 की है। उस समय देवेंद्र फडणवीस विपक्ष के नेता थे। उद्धव ठाकरे सरकार में एकनाथ शिंदे शहरी विकास मंत्री थे। ULC घोटाला 2016 का है। इसमें 160 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है।

इसके अलावा 5 मई 2021 से 21 मई 2021 के बीच सरदार पाटिल द्वारा उपयोग में लाई गई सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के कुछ पन्ने गायब पाए गए, जिसे सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश माना गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटिल और सहायक आयुक्त सरदार पाटिल ने गवाहों पर दबाव डालकर बयान बदलवाने और नाम जोड़ने का प्रयास किया। कोपरी पुलिस थाने में दर्ज एक अन्य मामले में अधिकार क्षेत्र न होने के बावजूद पूछताछ करने, धमकाने और बयान बदलवाने के आरोप भी उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटिल और सहायक आयुक्त सरदार पाटिल पर लगे हैं।

रश्मि शुक्ला ने रिपोर्ट में लिखा है कि संजय पांडेय ने तब ठाणे शहर के उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को फोन करके पूछा था कि देवेंद्र फड़णवीस और एकनाथ शिंदे को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया।

रिपोर्ट में कोपरी पुलिस स्टेशन के केस CR No. 176/2021 का उल्लेख भी है। इसमें आरोप है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल ने गिरफ्तारी के बाद पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की, जबकि वे इस मामले के जांच अधिकारी नहीं थे। पूछताछ के दौरान पुनमिया पर दबाव बनाया गया कि वे फडणवीस द्वारा बिल्डरों से वसूली की रकम बताएं।

देवेंद्र फड़णवीस, एकनाथ शिंदे के अलावा गिरीश महाजन की भी गिरफ़्तारी की प्लानिंग थी। यह मामला देवेंद्र फड़णवीस ने विधानसभा में भी उठाया था।

क्या है ULC घोटाला?

ULC (यूएलसी) का मतलब है अर्बन लैंड सीलिंग ऐक्ट। यह कानून 1976 में बना था। इसका मकसद था कि शहरों में जमीन कुछ लोगों के हाथ में न इकट्ठी हो। एक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा तय सीमा तक ही जमीन रख सकता था। बाकी जमीन सरकार को सौंपनी पड़ती थी। महाराष्ट्र में यह कानून 2007 में खत्म हो गया। लेकिन, पुराने मामलों में घोटाले हुए। ULC घोटाले में बिल्डरों और नेताओं ने मिलकर गैरकानूनी तरीके से जमीन हथियाई। वे ज्यादा जमीन रखते थे। रिश्वत देकर नियम तोड़ते थे। ठाणे में ऐसा ही एक घोटाला सामने आया। नवंबर 2016 में ठाणे पुलिस ने इसे पकड़ा। इसमें ULC नियमों का उल्लंघन था। ED ने भी इसकी जांच की। इसमें करोड़ों की संपत्ति जब्त हुई।

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