दिल्ली के ‘50 करोड़ी,’ ‘फायर ब्रांड’ जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ मुंबई के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में फाइल की रिट पिटीशन !!

यशवंत वर्मा और घनश्याम उपाध्याय

पहले दिल्ली हाई कोर्ट और बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ मुंबई के वकील घनश्याम उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन फाइल की है। घनश्याम उपाध्याय ने यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है।

यशवंत वर्मा को देश में ‘50 करोड़ी’ और ‘फायर ब्रांड’ जज के नाम जाना जाता है। वे दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे तभी 14 मार्च 2025 की रात उनके तुगलक क्रेसेंट सरकारी आवास के स्टोर रूम (फायर) में आग लग गयी थी। इस आग में अनुमानतः 500-500 के 50 करोड़ रुपये जल गए थे। ये अधजले नोट बोरों में भरे हुए थे।

इस घटना से पूरे देश में सनसनी मच गयी थी। परन्तु यशवंत वर्मा की सेहत अथवा पेशानी पर कोई फर्क नहीं पड़ा था। सिर्फ उनका ट्रांसफर दिल्ली से इलाहाबाद कर दिया गया। यह घटना इतनी बड़ी थी कि CJI, CBI, ED, ACB अथवा केंद्र सरकार को स्वतः संज्ञान लेकर जस्टिस यशवंत वर्मा पर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

देश भर के बुद्धिजीवी, कानूनविद, संगठन और बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन अपने-अपने हिसाब से यशवंत वर्मा पर कार्रवाई की मांग करते रहे। कुछ ने शिकायतें कीं कुछ ने रिट पिटीशन फाइल की। CJI संजीव खन्ना ने जांच समिति का गठन किया, जिसमें जस्टिस शील नागू (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस), जी. एस. संधावालिया (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे। यशवंत वर्मा ने इस जांच समिति (रिपोर्ट) को चुनौती दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया गया। महाभियोग की कार्यवाही के बीच, 10 अप्रैल 2026 में यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की प्रक्रिया भी समाप्त हो गई।

अब बॉम्बे हाई कोर्ट के जाने-माने वकील घनश्याम उपाध्याय ने यशवंत वर्मा पर कार्रवाई की मांग करते हुए पहले CBI, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और अन्य सम्बंधित विभागों में शिकायतें कीं। शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 25 जून 2026 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन फाइल कर दी। घनश्याम उपाध्याय की मांग है कि इस मामले में SIT गठित की जाये। SIT में ED, IT, ACB और पुलिस के इंटेलिजेंट अधिकारी नियुक्त किये जाएँ। SIT पहले यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करे। उनका CPU, CCTV फुटेज, CDR और मोबाइल अपनी कस्टडी में ले।

कानून के जानकार कहते हैं कि घनश्याम उपाध्याय ने सही समय पर रिट पिटीशन फाइल की है। जब यशवंत वर्मा सर्विस में थे तब उन पर कार्रवाई के लिए CJI से परमीशन लेनी पड़ती। अब वे सर्विस में नहीं हैं। इस्तीफा दे दिया है तो किसी परमीशन की जरूरत नहीं है।

बताते हैं कि यशवंत वर्मा गवर्नमेंट के गुड बुक में थे और कुछ अन्य बड़े न्यायाधीशों का भी पैसा उनके पास जमा रहता था। यशवंत वर्मा की अगली पोस्टिंग सुप्रीम कोर्ट में होने वाली थी।

Leave a Comment