दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने सुनाई। पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस ने अदालत से ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। पुलिस ने इस हत्या को “अत्यंत क्रूर”, “पूर्व नियोजित और निर्मम” बताते हुए इसे “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” (दुर्लभतम मामलों) की श्रेणी में रखने की दलील दी थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यह अपराध बेहद क्रूर था और खून की प्यास से भरी हिंसक भीड़ ने पीड़ित की निर्मम हत्या की थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों में सुधार की कोई संभावना नहीं है या जेल में रहने के बाद भी वे समाज के लिए स्थायी खतरा बने रहेंगे।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने अदालत में कहा, “अंकित शर्मा का अपहरण कर उनके साथ लगातार अमानवीय तरीके से मारपीट की गई। उनके शरीर पर कुल 51 घाव थे, जिनमें से 18 धारदार हथियारों से पहुंचाये गए थे। यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें किसी व्यक्ति पर केवल एक-दो वार किए गए हों।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय आरोप लगाया कि आरोपियों ने अंकित शर्मा की मौत के बाद भी उनके शव पर हमला जारी रखा। आरोपी इंसान नहीं बल्कि जानवर थे। उन्होंने मृतक के प्रति भी कोई सम्मान नहीं दिखाया, इसलिए उन्हें उम्रभर सलाखों के पीछे रखा जाना चाहिए और मृत्युदंड दिया जाना चाहिए। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियार उनके इरादे और अपराध की भयावह प्रकृति को दर्शाते हैं। यह पूरी तरह सोच-समझकर किया गया निर्मम हत्या का मामला था। कोई भी व्यक्ति बिना योजना बनाए कसाई जैसे भारी धारदार हथियार लेकर नहीं चलता।
13 जुलाई 2026 को दिल्ली की अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। अदालत ने कहा था कि ताहिर हुसैन ने एक “हथियारबंद भीड़” के साथ मिलकर “बर्बर और लगातार हमला” किया था।
अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह संदेह से परे साबित करने में सफल रहा कि ताहिर हुसैन एक “गैरकानूनी जमावड़े” का हिस्सा थे, जो हिंदुओं के प्रति दुर्भावना रखते हुए चांद बाग पुलिया पर दंगा, लूटपाट, आगजनी और हिंदुओं तथा उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के साझा उद्देश्य से एकत्र हुआ था।
अभियोजन ने कहा, “जो लोग दया की मांग करते हैं, उन्हें स्वयं भी दया दिखानी चाहिए। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि किसी आरोपी ने पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की हो। एक नगरसेवक होने के बावजूद ताहिर हुसैन ने अपनी सार्वजनिक जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया।
ताहिर हुसैन की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन ने दलील दी कि यह मामला ऐसा नहीं है जिसमें सुधार की कोई संभावना न हो। उन्होंने कहा- मुकदमे के दौरान किसी भी व्यक्ति ने सीधे तौर पर मुझे इस अपराध का जिम्मेदार नहीं ठहराया। अदालत को भी इस घटना के पीछे किसी आपराधिक साजिश का कोई सबूत नहीं मिला। केवल चोटों की संख्या मृत्युदंड तय करने का आधार नहीं हो सकती।
अपने फैसले में अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को हत्या का दोषी ठहराया, जबकि छह अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने सभी आरोपियों को आपराधिक साजिश के आरोप से भी दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को खजूरी खास स्थित अपने घर के पास अंकित शर्मा दो समूहों के बीच हो रही झड़प के दौरान चांद बाग पुलिया क्षेत्र में पहुंच गए थे। दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश के दौरान कथित तौर पर 20-25 लोगों की भीड़ ने उनका अपहरण कर लिया, उनकी बेरहमी से पिटाई की और उन पर कई बार चाकू से हमला किया। अगले दिन उनका शव इलाके के एक नाले से बरामद हुआ।

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