केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक निजी दूरसंचार कंपनी के दो कर्मचारियों के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से 19.33 करोड़ रुपये की भविष्य निधि (PF) राशि फर्जी तरीके से निकालने के आरोप में FIR दर्ज की है। आरोप है कि दोनों ने कंपनी के 94 काल्पनिक (फर्जी) कर्मचारियों के नाम पर PF की राशि निकाल ली।
CBI ने वैभव वर्मा और कामराजू मुत्याला के खिलाफ 16 जुलाई को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। यह कार्रवाई EPFO के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सतर्कता), दिल्ली की शिकायत के आधार पर की गई। दोनों के अलावा अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता कंपनी नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने जनवरी 2025 में EPFO को इस कथित अनियमितता की शिकायत दी थी। कंपनी की आंतरिक जांच में सामने आया कि वैभव वर्मा, जो पेरोल क्लस्टर लीड थे, और कामराजू मुत्याला, जो पेरोल मैनेजमेंट प्रमुख थे, PF ट्रांसफर से सम्बंधित कार्य करते थे।
जांच में यह भी पाया गया कि दोनों ने EPFO को भेजी गई फाइलें अपने लैपटॉप से हटा दी थीं। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक संचार में ऐसे लोगों का विवरण मिला जो कंपनी के कर्मचारी नहीं थे। जांच में रोजगार संबंधी झूठी पुष्टि, संदिग्ध फर्जी कर्मचारियों के KYC दस्तावेजों को आधिकारिक लॉगिन के जरिए मंजूरी दिए जाने जैसे सबूत भी मिले, जिससे यह संकेत मिला कि उन्हें इन अनियमित प्रविष्टियों की जानकारी थी।
फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर नोकिया ने दोनों अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
EPFO की शिकायत के अनुसार, नोकिया कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत एक छूट प्राप्त प्रतिष्ठान था। कंपनी ने जुलाई 2023 में सितंबर 2023 से अपनी छूट समाप्त करने का आवेदन दिया था। उसी महीने EPFO ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कंपनी के PF खातों में जमा पूर्व निधि को EPFO में स्थानांतरित करने और 1 सितंबर 2023 से उसे गैर-छूट प्राप्त प्रतिष्ठान के रूप में संचालित करने की अनुमति दे दी।
इसके बाद नोकिया ने 1 सितंबर 2023 से सभी पात्र कर्मचारियों के PF खातों की संपूर्ण राशि और संबंधित विवरण EPFO को हस्तांतरित कर दिए।
नोकिया से बड़े पैमाने पर PF खातों में धोखाधड़ी की शिकायत मिलने के बाद EPFO के जोनल कार्यालय और जोनल फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट कमेटी (ZFRMC) ने मामले की जांच की। जांच में पाया गया कि 94 संदिग्ध फर्जी या गैर-वास्तविक सदस्यों के नाम पर PF निकासी की गई थी।
CBI द्वारा दर्ज FIR के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी से नोकिया को लगभग 20 करोड़ रुपये का गलत तरीके से वित्तीय नुकसान हुआ।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नोकिया के प्रवक्ता ने कहा- नोकिया अनुपालन को अत्यंत गंभीरता से लेता है और अपने सभी व्यावसायिक कार्यों में नैतिकता एवं ईमानदारी के सर्वोच्च मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम जांच में संबंधित अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। चूंकि मामला अभी जांचाधीन है, इसलिए इस पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
