पूर्व IAS राधेश्याम मोपलवार से 10 करोड़ रुपये हफ्ता वसूली मामले में गैंगस्टर रवि पुजारी पर आरोप तय

 

महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (MCOCA) की विशेष अदालत ने सोमवार, 21 सितम्बर 2026 को जेल में बंद गैंगस्टर रवि पुजारी के खिलाफ रंगदारी के दो मामलों में आरोप तय किए। इनमें 2017 में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के तत्कालीन उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और पूर्व IAS अधिकारी राधेश्याम मोपलवार से 10 करोड़ रुपये हफ्ता मांगने का मामला भी शामिल है।

मामला नवंबर 2017 का है। राधेश्याम मोपलवार ने निजी जासूस सतीश मांगले और दो अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उन्होंने राधेश्याम मोपलवार से 10 करोड़ रुपये की मांग की और रिश्वत लेने से संबंधित कथित ऑडियो क्लिप सार्वजनिक करने की धमकी दी। अभियोजन के अनुसार बाद में यह मांग घटाकर 7 करोड़ रुपये कर दी गई।

ठाणे पुलिस की हफ्ता विरोधी प्रकोष्ठ (AEC) ने सतीश मांगले को 1 करोड़ रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसकी पत्नी श्रद्धा मांगले और साले अतुल तांबे को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया।

इन गिरफ्तारियों के बाद राधेश्याम मोपलवार को दो अंतरराष्ट्रीय कॉल आए। कॉल करने वाले ने खुद को रवि पुजारी बताया और राधेश्याम मोपलवार तथा उनकी बेटी को जान से मारने या गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। साथ ही तीनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज रंगदारी का मामला वापस लेने की मांग की। अब इन धमकियों के सिलसिले में रवि पुजारी पर भी आरोप तय किए गए हैं। उसका एक सहयोगी अनिल बाबूलाल वेदमेहता इस मामले में फरार आरोपी है।

अभियोजन ने रवि पुजारी पर संगठित अपराध सिंडिकेट का हिस्सा होने तथा संगठित अपराध की साजिश रचने और उसे अंजाम देने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। आरोप है कि रंगदारी की रकम सिंडिकेट के आर्थिक लाभ के लिए मांगी गई थी।

हालांकि, 2023 में मामले में बड़ा मोड़ आया था। MCOCA मामलों की विशेष अदालत ने सतीश मांगले, श्रद्धा मांगले और अतुल तांबे को बरी कर दिया था। अदालत ने जांच में कई खामियां पाईं और कहा था कि तीनों आरोपियों का रवि पुजारी से कोई स्थापित संबंध सामने नहीं आया।

अदालत ने यह भी गौर किया था कि फरवरी 2020 में सेनेगल से प्रत्यर्पण के बाद पुलिस ने रवि पुजारी की हिरासत नहीं मांगी थी। इसके अलावा, राधेश्याम मोपलवार को आए कथित फोन कॉल की आवाज से मिलान करने के लिए रवि पुजारी का वॉयस सैंपल भी नहीं लिया गया था। इसके बावजूद रवि पुजारी इस मामले में वांछित आरोपी बना रहा।

दूसरे मामले में आरोप वर्ष 2006 के हैं। अदालत ने रवि पुजारी पर दोषी ठहराए जा चुके एक आरोपी के साथ मिलकर आतिफ अहमद खलील अहमद शेख से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। अभियोजन के अनुसार, पीड़ित को जान से मारने की धमकी देकर रकम मांगी गई थी।

आरोप है कि 17 से 25 मई 2006 के बीच पुजारी को शेख से 5 लाख रुपये की एक किस्त मिली थी। इस मामले में भी रवि पुजारी पर साजिश और कथित रंगदारी के दौरान पीड़ित को धमकाने के आरोप तय किए गए हैं।

इस मामले में भी रवि पुजारी पर MCOCA के तहत आरोप हैं। अभियोजन का दावा है कि रंगदारी संगठित अपराध की गतिविधियों का हिस्सा थी और इसका उद्देश्य आर्थिक लाभ हासिल करना था। आरोपों के मुताबिक, रवि पुजारी सिंडिकेट का प्रमुख था और उसकी कथित गतिविधियां लगातार चल रही गैरकानूनी गतिविधियों की श्रेणी में आती थीं।

विशेष न्यायाधीश एन. आर. प्रधान ने दोनों मामलों में रवि पुजारी के खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है। अदालत द्वारा तय किए गए आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं और मुकदमे के दौरान अभियोजन को इन्हें साबित करना होगा।

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