पारधी कार्यकर्ता सुमन काले की पुलिस हिरासत में मौत की दोबारा जांच के लिए SIT गठित

 

महाराष्ट्र पुलिस ने पारधी समुदाय की सामाजिक कार्यकर्ता सुमन काले की कथित हिरासत में मौत की नए सिरे से और व्यापक जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। उनकी मौत के करीब दो दशक बाद और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस द्वारा मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जाने के लगभग दो महीने बाद यह कदम उठाया गया है।

13 अगस्त को विशेष पुलिस महानिरीक्षक (IGP), राज्य, लक्ष्मी गौतम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, SIT अहिल्यानगर के भिंगार कैंप पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज आपराधिक मामले की जांच करेगी। इसके अलावा सुमन काले की मौत से संबंधित सभी आवेदनों, शिकायतों और अन्य मामलों की भी जांच की जाएगी।

महाराष्ट्र CID, पुणे के अपराध-पश्चिम विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक सुधीर हिरेमठ को SIT का प्रमुख नियुक्त किया गया है, जबकि महाराष्ट्र, मुंबई के राजमार्ग सुरक्षा विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रवीण सालुंके SIT के कामकाज की निगरानी करेंगे।

SIT को निर्देश दिया गया है कि वह आपराधिक मामले की जांच के साथ-साथ सुमन काले की मौत से जुड़े सभी आवेदनों और मामलों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी कर संबंधित कार्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंपे।

यह घटनाक्रम सुमन काले के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे उस अभियान के बाद हुआ है, जिसमें हिरासत में यातना और हत्या के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही थी।

पारधी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली सुमन काले को कथित तौर पर मई 2007 में सोने की चोरी के संदेह में श्रीरामपुर पुलिस ने हिरासत में लिया था।

उनके भाई गिरीश चव्हाण करीब दो दशकों से इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार का आरोप है कि सुमन काले को 12 मई से 14 मई 2007 के बीच अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और उन्हें गंभीर शारीरिक तथा मानसिक यातना दी गई। परिवार ने पुलिस के शुरुआती दावे पर भी सवाल उठाया है, जिसमें कहा गया था कि सुमन काले ने जहर खाकर आत्महत्या की थी।

कई वर्षों की कानूनी लड़ाई और विभिन्न स्तरों पर शिकायतों के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आखिरकार हत्या का मामला दर्ज किया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी पुलिस अधिकारियों और इलाज करने वाले डॉक्टर को बचाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया था।

जांच के दौरान दर्ज निष्कर्षों के अनुसार, सुमन काले को कथित तौर पर 12 मई 2007 को उनके घर से हिरासत में लिया गया था और 16 मई 2007 तक आरोपी पुलिसकर्मियों की अवैध हिरासत में रखा गया।

SIT का गठन उस प्रतिनिधिमंडल के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से मुलाकात के बाद हुआ है, जिसका नेतृत्व पद्मश्री से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश प्रभुणे ने किया था। गिरीश प्रभुणे ने विशेष रूप से पारधी समुदाय सहित घुमंतू जनजातियों के कल्याण के लिए व्यापक स्तर पर काम किया है। प्रतिनिधिमंडल में सुमन काले के परिवार के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

देवेंद्र फड़णवीस ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की कड़ी धाराएं लागू करने का भी निर्देश दिया था।

परिवार ने इससे पहले वरिष्ठ IPS अधिकारी सुनील रामानंद की जांच में भूमिका को लेकर भी चिंता जताई थी। सुनील रामानंद वर्तमान में राज्य CID में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। कथित हिरासत में यातना के समय वह जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे।

इसी वजह से परिवार ने संभावित हितों के टकराव का हवाला देते हुए मांग की थी कि सुनील रामानंद को जांच से जुड़े किसी भी पद या भूमिका से हटाया जाए।

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