कोहिनूर-भाग-2 -नाला घोटाला : नाले की जगह हड़प बन रही कोहिनूर बिल्डिंग, आर्किटेक्ट भूषण रूपाणी, बिल्डर अजीत भाटिया फिर भी UMC ने कर दिया प्लान पास !!

अजीत भाटिया

अकेला

पप्पू कालानी, गोधू कृष्णानी, जया साधवानी, नन्द जेठानी, अन्नू मनवानी, सुमित चक्रवर्ती, राम वाधवा, दीपक सुहानी, नरेश रोहड़ा, हरेश कृष्णानी, लक्ष्मण कटारिया, विनोद धनकानी, गोपी हसीजा, प्रकाश मुले, गणेश शिम्पी, जमीर लेंगरेकर, अजीत भाटिया, भूषण रूपाणी और उल्हासनगर, कहने के लिए तो कुछ अक्षरों को जोड़कर बने शब्द हैं। नाम हैं। लेकिन इन शब्दों (नामों) की कारगुजारियों को अगर लिखने बैठेंगे तो ये महापुराण बन जाएंगे। अपनी-अपनी फील्ड (जिनमें जिनको महारत हासिल है) के ये उल्हासनगर के नूरे-ए-नज़र हैं। फिर उल्हासनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (UMC) को यह बात कैसे नहीं पता कि अजीत भाटिया उल्हासनगर का सबसे बड़ा चीटर है। भूषण रूपाणी सबसे बड़ा फ्रॉड आर्किटेक्ट है। कोहिनूर बिल्डर्स एन्ड डेवलपर्स का भूषण रूपाणी ने जब प्लान पुटअप किया तो UMC ने प्लान कैसे पास कर दिया। वो भी स्पेशल केस के तहत।

बता दें कि अजीत भाटिया, मोहन ददलानी, इन्द्रलाल थारवानी और दीपक जगवानी सोनारा हॉल के पीछे, उल्हासनगर- 1 (यू-नंबर- 398, सीटीएस नंबर-6684, सीट नंबर-72) में 13 मंजिली एक बिल्डिंग बना रहे हैं। शिवसेना के वरिष्ठतम नगरसेवक और नेता राजेंद्रसिंह भुल्लर “महाराज” ने महापालिका में शिकायत कर ठगी के इन कोहिनूरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। इनमें भूषण रूपाणी भी है। न्यूज़ के प्रथम भाग में ABI ने लिखा था कि कोहिनूर के लिए सब्मिट किये गए सभी डॉक्युमेंट्स फर्जी हैं। अब भाग-2 में पढ़िए कि कैसे नाले की 9.5 मीटर जमीन को कब्जे में लेकर बिल्डिंग बनाई जा रही है।

उल्हासनगर में सार्वजनिक शौचालय और नैसर्गिक नाले के ऊपर बिल्डिंग बनाने का फैशन है। मृत व्यक्ति को ज़िंदा करके डॉक्युमेंट्स बना लेने का दूसरा फैशन है। बस उपरोक्त कोहिनूरों का नाम उस बिल्डिंग से किसी न किसी प्रकार जुड़ा होना चाहिए। अजीत भाटिया और भूषण रूपाणी के इस कोहिनूर बिल्डिंग के पास भी एक नैसर्गिक नाला है। यूडीसीपीआरएम के नियम क्रमांक 3. 1. 1., (प्रकरण 3) के अनुसार नाले से 6 मीटर दूर ही बिल्डिंग बनाई जा सकती है। एक और कायदे के अनुसार बिल्डिंग की परिधि में 6 मीटर की जगह छोड़नी है। उस हिसाब से इस कोहिनूर बिल्डिंग के लिए कुल 12 मीटर जगह छोड़नी थी। लेकिन अजीत भाटिया और भूषण रूपाणी गैंग ने बिल्डिंग के लिए थोड़ी भी जगह नहीं छोड़ी। कह सकते हैं कि बिल्डिंग 9.5 मीटर नाले की जगह पर कब्ज़ा करके बन रही है। बिल्डिंग के सामने से भी 6 मीटर का रास्ता होना चाहिए था लेकिन प्लान में मात्र 2.40 मीटर ही दिखाया है। ध्यान रहे कि इस बिल्डिंग का प्लान आर्किटेक्ट भूषण रूपाणी ने पुटअप किया था और उस समय टाउन प्लानर महान भ्रष्ट प्रकाश मुले था। कमिश्नर अज़ीज शेख था।

जिस हिसाब से कोहिनूर बिल्डिंग के डॉक्युमेंट्स फर्जी हैं, निर्माण में, प्लान में नियम और कायदे का उल्लंघन हुआ है, फायर ब्रिगेड को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देना ही नहीं चाहिए था। लेकिन फायर ब्रिगेड ने NOC दे दी है। एक मजेदार बात कि प्लान (निर्माण परमीशन नक़्शे) पर जमीन मालिक मोहन ददलानी और टाउन प्लानर प्रकाश मुले की साइन ही नहीं है। दूसरी मजेदार बात। विट्ठलवाड़ी में किसी व्यक्ति का एक गाला है। गाला किराये पर है। इस गाले के किराये का एग्रीमेंट (डॉक्युमेंट्स) मोहन ददलानी ने रजिस्ट्री में दिखा दिया और TLR में अपना नाम चढ़वा लिया। 

कहावत है कि- भैंस जब भी पूंछ उठाएगी तो गोबर ही करेगी। गाना थोड़ी ही न गाएगी। वैसे अजीत भाटिया, भूषण रूपाणी, अन्नू मनवानी, गोधू कृष्णानी, प्रकाश मुले जैसे चीटर चीटिंग ही करेंगे। राम भजन थोड़ी ही करेंगे। फिर भी उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन ने कोहिनूर बिल्डिंग को स्पेशल केस करके प्लान पास कर दिया। इसलिए तो ABI (abinewz.com) लिखता है- इट हैपेन्स ओनली इन उल्हासनगर

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