सीनियर इंस्पेक्टर ज्योति घनश्याम बागुल-भोपले
अकेला
मुंबई के उपनगर चारकोप पुलिस स्टेशन की सीनियर इंस्पेक्टर ज्योति घनश्याम बागुल-भोपले ने रिश्वत लेने का नया पैटर्न इज़ाद किया है। पहले तो उन्होंने चीटर अनिल मिश्रा को अपना शिष्य बनाया। फिर अनिल मिश्रा ने गुरु दक्षिणा में उन्हें साष्टांग दण्डवत किया। अंत में आशीर्वाद स्वरूप ज्योति भोपले ने एक फर्जी FIR दर्ज करके दिया।
FIR दर्ज करना एक कॉमन प्रक्रिया है। रिश्वत लेकर FIR दर्ज करना भी मुंबई पुलिस में कॉमन प्रैक्टिस है। फर्जी FIR दर्ज करना तो बहुत ही कॉमन बात है। FIR का एक रेट है। FIR की छोड़िये NC दर्ज करने का भी फिक्स रेट है। परन्तु ज्योति भोपले ने रिश्वत में साष्टांग प्रणाम लिया और फिर फर्जी FIR दर्ज किया। मुंबई पुलिस में यह नया पैटर्न स्टार्ट हुआ है। रिश्वत में साष्टांग दण्डवत।
हुआ यूँ कि अनिल सुरेंद्र मिश्रा नामक एक प्रोफेशनल चीटर 6 मार्च 2025 को सीनियर इंस्पेक्टर ज्योति घनश्याम बागुल-भोपले से मिला। अनिल मिश्रा ने ज्योति भोपले को बताया कि उनका चेहरा किसी मठ की साध्वी जैसा है। उनके चेहरे पर साध्वी जैसा जो तेज है उससे इम्प्रेस्ड होकर आज से वह उन्हें (ज्योति भोपले को) अपना गुरु (बल्कि कुलगुरु) मान रहा है। इसके लिए वह उन्हें गुरु दक्षिणा देना चाहता है। गुरु दक्षिणा शब्द सुनकर ज्योति भोपले के चेहरे पर सचमुच चमक आ गयी। उन्हें लगा कि ताजा-ताजा बना उनका यह शिष्य कोई बेशकीमती गुरु दक्षिणा ही देगा। मसलन गोल्ड रिंग या डायमंड नेकलेस टाइप कुछ। या 10-20 एकड़ जमीन के पेपर। अथवा कम से कम वजनी लिफाफा तो देगा ही। उसी लालच में ज्योति भोपले ने तथास्तु जैसी मुद्रा बनाकर आदेश दे दिया कि वह गुरु दक्षिणा दे सकता है। बस क्या था। अनिल मिश्रा कुर्सी पर से उठा। वह जमीन पर ज्योति भोपले के पैर के पास साष्टांग दण्डवत की मुद्रा में लेट गया। बोला- त्वमेव माता च पिता त्वमेव। परन्तु इस बार ज्योति भोपले को सदमा लगा। कुछ माल नहीं मिला। सिर्फ चापलूसी मिली। यह दृश्य लगभग-लगभग चारकोप पुलिस स्टेशन के सभी कर्मियों ने देखा। अपने सीनियर मैडम के पैर के पास जमीन पर साष्टांग दण्डवत लेटे व्यक्ति को देखकर सब हंस पड़े। थोड़ी मुस्कराई तो ज्योति भोपले भी थीं।
परन्तु ज्योति भोपले तो गुरु की दशा को प्राप्त हो गयी थीं। उन्होंने शिष्य से पूछा- तुम्हें क्या चाहिए वत्स ! वत्स यानी अनिल मिश्रा ने कहा- हे माते ! चार माह पहले इसी पुलिस स्टेशन में उसके पुत्र अभिषेक मिश्रा ने एक NC लिखवाई थी। उसे FIR में कन्वर्ट कर दीजिये, बस। ज्योति भोपले ने तथास्तु कहा। अपने स्टाफ को आदेश दिया कि उनके शिष्य की इच्छा पूरी की जाये। चार माह पहले दर्ज NC को FIR में कन्वर्ट कर दिया जाय। फिर स्टाफ ने करिश्मा मिश्रा की शिकायत पर 6 मार्च 2025 को चारकोप पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 115(2), 3(5), 333, 351(2), 352 के तहत निकिता रतांशी, कुंती रतांशी और विक्रांत आनंद के खिलाफ FIR (नंबर-0114/2025) दर्ज कर लिया।
बैकग्राउंड
- अनिल मिश्रा का बेटा अभिषेक मिश्रा (खुद को IAS बताता था) करिश्मा रतांशी से शादी करना चाहता था। चूँकि अनिल मिश्रा प्रोफेशनल चीटर है। हद दर्जे का चिरकुट व्यक्ति है इसलिए करिश्मा की माँ कुंती रतांशी और बहन निकिता रतांशी नहीं चाहती थीं कि करिश्मा ऐसे परिवार की बहू बने। 3 दिसम्बर 2024 को अनिल मिश्रा की पत्नी पार्वती मिश्रा ने फोन कर निकिता रतांशी और कुंती रतांशी को अपने घर बुलाया। इस बात के प्रमाण ABI के पास मौजूद हैं कि पार्वती मिश्रा ने फोन कर निकिता रतांशी को अपने घर आमंत्रित किया था। करिश्मा रतांशी और फैमिली फ्रेंड विक्रांत आनंद भी गए थे। चाय-पानी कर थोड़ी देर में सब वापस आ गए। लेकिन करिश्मा के होने वाले पति अभिषेक मिश्रा ने दूसरे दिन 4 दिसम्बर 2024 को चारकोप पुलिस स्टेशन में निकिता रतांशी और कुंती रतांशी के खिलाफ सेक्शन- 352 और 351(2) के तहत NC (नंबर- 2209/2024) दर्ज करा दी।
2- भारतीय जनता पार्टी की चित्रपट आघाड़ी यूनिट के प्रदेशाध्यक्ष समीर दीक्षित ने अनिल मिश्रा के और अभिषेक मिश्रा के खिलाफ बांद्रा पुलिस स्टेशन में 5 फरवरी 2025 को भारतीय न्याय संहिता -2023 की धारा 318(4) तथा 319(2) के तहत FIR (संख्या- 0192/2025) दर्ज करा दी। इस FIR के बाद बांद्रा पुलिस ने अनिल मिश्रा के फर्जी अवॉर्ड शो (दादासाहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड (DPIFF)) की परमीशन रद्द कर दी। 20 फरवरी 2025 को आयोजित इस शो की बांद्रा के फाइव स्टार होटल ताज लैंड्स इंड ने भी बुकिंग रद्द कर दी। इससे अनिल मिश्रा को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। वह पगला गया।
3– निकिता रतांशी की शिकायत पर 5 मार्च 2025 को अम्बोली पुलिस स्टेशन में करिश्मा मिश्रा, पार्वती मिश्रा, नुनुपति देवी और राजू तिवारी के खिलाफ बीएनएस की धारा- 333, 351(2), 352, 356(2), 115(2) और 3(5) के तहत दूसरी FIR (नंबर- 0265/2025) दर्ज हो गयी।
4– इतना ही नहीं सुरेश मारिबा जंगले की शिकायत पर अम्बोली पुलिस स्टेशन में ही अनिल मिश्रा की पत्नी पार्वती मिश्रा के खिलाफ बीएनएस की धारा 3(1)(S) के तहत तीसरी FIR दर्ज हो गयी। इससे बौखलाए अनिल मिश्रा ने बदला लेने के लिए (कुछ नया आरोप नहीं मिला तो) चार माह पहले दर्ज NC को FIR में कन्वर्ट करवा दिया।
ज्योति भोपले ध्यान दें…
चूँकि पार्वती मिश्रा ने कुन्ती मिश्रा को फोन कर बुलाया था तो ट्रेसपासिंग की FIR बनती ही नहीं है। NC में शिकायतकर्ता अभिषेक मिश्रा है। FIR में शिकायतकर्ता करिश्मा मिश्रा है। अगर NC FIR में कन्वर्ट हो रही है तो शिकायतकर्ता एक ही होना चाहिए। NC में आरोपी दो हैं। FIR में आरोपी तीन हैं। NC में जो जो आरोपी थे वही आरोपी FIR में भी होने चाहिए। वही सेक्शंस FIR में होने चाहिए। FIR में ट्रेसपासिंग का सेक्शन कैसे बढ़ा। सबसे बड़ी बात जिस तारीख (3 दिसम्बर 2024) को घटना हुई उस तारीख को करिश्मा की शादी ही नहीं हुई थी। फिर किस हैसियत से उसने FIR दर्ज करवाया। तब तक मिश्रा फैमिली से तो उसका कोई सम्बन्ध था ही नहीं। 3 दिसम्बर 2024 तक उसका सरनेम रतांशी था। फिर FIR में उसने सरनेम मिश्रा कैसे लगाया। और NC को FIR में कन्वर्ट करने में चार महीने का समय क्यों लगा ?
अनिल मिश्रा के खिलाफ चारकोप पुलिस स्टेशन में ही वर्ष 2014 में IPC के सेक्शन 171 के तहत FIR (नंबर-5/2014) दर्ज है।
अनिल मिश्रा…
अनिल मिश्रा ने दादासाहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड (DPIFF) नाम से एक NGO खोला है। यह NGO रजिस्टर्ड नहीं है। फर्जी NGO है। इस NGO के जरिये यह फ़िल्मी हस्तियों को पुरस्कार बेचता है। उसके इस काण्ड में पार्वती मिश्रा, बेटा अभिषेक मिश्रा और बेटी श्वेता मिश्रा भी साथ देते हैं।
अनिल मिश्रा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री को अपना ख़ास बताता है। इनके नाम पर रुपये ऐंठता है। लेटर हेड और विजिटिंग कार्ड पर भारत सरकार लिखता है। अशोक स्तंभ का प्रतीक लगाता है।
मुंबई की मरीन लाइन्स पुलिस ने अनिल मिश्रा को 31 अक्टूबर 2014 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के शपथ समारोह में (वानखेड़े स्टेडियम में) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीक पहुँच जाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
अनिल मिश्रा के खिलाफ चारकोप पुलिस स्टेशन में ही वर्ष 2014 में IPC के सेक्शन 171 के तहत FIR (नंबर-5/2014) दर्ज है।
