शेखर बागड़े
अकेला
मालेगाँव ब्लास्ट-भगवा आतंकवाद के सीरीज़ नंबर- 6 में आपने पढ़ा कि मिलिट्री इंटेलीजेंस (MI) के इन्फॉर्मर सुधाकर चतुर्वेदी के घर में RDX और अन्य विस्फोटक सामग्री तब आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के सहायक पुलिस निरीक्षक (API) रहे शेखर बागड़े ने प्लांट की थी। कभी आपने सोचा कि वह RDX शेखर बागड़े के पास कहाँ से आया था। अब ABI (abinewz.com) इस बात का खुलासा कर रहा है कि यह वही RDX है जो मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट में प्रयोग किया गया था। ABI एक और सवाल छोड़ रहा है कि प्रत्येक बम विस्फोट में Forensic Expert डॉ. सुभाष बाकरे ही जांच के लिए क्यों बुलाया जाता था।
शेखर बागड़े वर्तमान में ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) है। यह देवेन भारती, प्रदीप शर्मा, विजय सालस्कर, दया नायक, रवींद्र आंग्रे, अनिल महाबोले, शमशेर खान पठान, सचिन वझे आदि की श्रेणी का (डॉट. डॉट. डॉट) अधिकारी है। शेखर बागड़े 3 अक्टूबर 2008 को MI इन्फॉर्मर सुधाकर चतुर्वेदी के नासिक घर में RDX प्लांट करते पकड़ा गया था। शेखर बागड़े के पास वह RDX कहाँ से आया। राष्ट्रीय जांच दल (NIA) सूत्रों के अनुसार शेखर बागड़े के पास जो RDX (Original Form) है/था, वही 1993 में मुंबई में हुए बम ब्लास्ट में प्रयोग हुआ था। सूत्र बताते हैं कि वही RDX मुंबई पुलिस (ATS) के पास अभी भी स्टॉक में है।
Scotland Yard के बाद Best Detection का तमगा मुंबई पुलिस ने हासिल किया हुआ है। लेकिन हरकतें बेवकूफी और कायराना रही हैं। किसी छोटे-मोटे क्रिमिनल को जब बड़ा क्रिमिनल दिखाना होता था तो ये Best Detection Officer उसके पास से स्टेनगन बरामद हुआ दिखा देते थे। जब उनकी यह हरकत रिपीट होने लगी। मीडिया और कोर्ट में सुगबुगाहट होने लगी तो यह हरकत बंद कर दी। दरअसल, पहले बरामद स्टेनगन की सील खोलकर उसे प्रेस कांफ्रेंस में रख देते थे। अपनी फोटो अखबार में छपवा लेते। शाबाशी लूट लेते थे। फिर उसे सील कर देते थे।
मुंबई पुलिस में Encounter Specialist और Encounter King भी हैं। उसी दौरान क्राइम ब्रांच के एक DCP थे प्रदीप सावंत। इनका रुतबा पुलिस कमिश्नर और गृह मंत्री से भी बड़ा था। इनको किसी ने याद दिलाया प्रभु ! आपने अब तक एक ही स्पॉट पर पांच बार इन्कॉउंटर किया है। ये कैसा संयोग है कि गैंगस्टर एक ही स्पॉट पर मीटिंग करने अथवा बिजनेसमैन को गोली मारने आते हैं। आपके लिए वही एक ही स्पॉट लकी है क्या। कभी मुसीबत में फंस जाओगे। तब उस लकी स्पॉट पर इन Encounter Specialists और Encounter Kings ने Encounter बंद किया।
ऐसे ही शेखर बागड़े भी है।
इसी से मिलती-जुलती एक और घटना। पहले तो अक्सर बम ब्लास्ट होते थे। फिर प्रत्येक ब्लास्ट की Forensic जांच करने के लिए डॉ. सुभाष मधुकर बाकरे पहुँच जाता था। यह Forensic Expert है/था। वर्ष 2006 और 2008 मालेगाँव ब्लास्ट के Explosives की भी जाँच सुभाष बाकरे ने की थी। शेखर बागड़े ने सुधाकर चतुर्वेदी के घर जो RDX प्लांट किया था उसकी भी जांच सुभाष बाकरे ने की थी। सवाल है कैसे ? इसका जवाब भी ABI के पास है। तब ATS में एक ACP थे मोहन कुलकर्णी। मोहन कुलकर्णी सुभाष बाकरे के नाम लेटर लिखते थे कि श्रीमान आप (सुभाष बाकरे जी) आकर इस ब्लास्ट की जांच करो। जबकि लेटर Forensic Department के Director के नाम लिखना चाहिए। Director जिसको चाहते भेजते। अपने नाम लेटर पाकर सुभाष बाकरे दौड़ा-दौड़ा चला जाता था। ATS को जिस तरह, जिस प्रकार की Report चाहिए होती थी, दे देता था।
मुंबई से 200 किलोमीटर दूर नासिक जिले के उपनगर मुस्लिम बहुल इलाके मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बम ब्लास्ट हो गया था। इस ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे। क्रमशः …

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