इंस्पेक्टर परवीन यादव
जगदीश कस्तुरे
महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले के बेगमपुरा पुलिस थाने की पुलिस इंस्पेक्टर परवीन यादव ने महाराष्ट्र पुलिस में फर्जी डॉक्युमेंट्स के आधार पर नौकरी हासिल की है। असल में परवीन यादव मुस्लिम समुदाय से हैं लेकिन वे हिन्दू बनकर नौकरी कर रही हैं। इस बाबत परवीन यादव के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में साल 2024 से याचिका लंबित है।
उल्लेखनीय है कि इंस्पेक्टर परवीन यादव के खिलाफ याचिका करने वाले मुकेश सुरेश प्रसाद पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। मुकेश प्रसाद परवीन यादव के एक हिसाब से पारिवारिक सदस्य भी हैं। इसलिए उन्हें बखूबी मालूमात है कि परवीन यादव मुस्लिम समुदाय से हैं परन्तु पुलिस की नौकरी हिन्दू बनकर हासिल की है। इस गंभीर आरोप को पुख्ता करने के लिए मुकेश प्रसाद ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत समस्त डॉक्युमेंट्स हासिल किये। डॉक्युमेंट्स बताते हैं कि परवीन यादव की जाति (प्रमाण पत्र) में बड़ा झोल है। सो उनको नौकरी से बर्खास्त करने की मांग को लेकर मुकेश प्रसाद ने साल 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दाखिल कर दी। न्यायमूर्ति किशोर संत और न्यायमूर्ति आबासाहेब शिंदे की खंडपीठ के समक्ष याचिका लंबित है। न्यायमूर्तिद्वय ने इस बाबत पुलिस इंस्पेक्टर परवीन यादव को नोटिस जारी कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।
इंस्पेक्टर परवीन यादव के खिलाफ शिकायत और याचिका की प्रति ABI (abinewz.com) के पास मौजूद है।
याचिका के अनुसार परवीन यादव का वास्तविक नाम परवीन ताहेरमिया सैयद है। दस्तावेजों में उल्लेख है कि उन्होंने जालना स्थित जवाहरलाल नेहरू स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1993 में जालना के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी द्वारा उनके नाम में परिवर्तन किए जाने का भी उल्लेख है। बाद में वे परवीन ताराचंद यादव बन गयीं।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि जालना के कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाणपत्र में तिथियों में हेरफेर किया गया है। प्रमाणपत्र के ऊपरी हिस्से में 6 जनवरी 1996 तथा निचले हिस्से में 6 जनवरी 1995 अंकित है।
इसके अतिरिक्त ABI संवाददाता ने पाया कि परवीन यादव की जारी प्रमाण पत्र की पहले तिथि 1/ 1/1993 लिखी हुई थी। बाद में उसे 6/1/1995 और 6/1/1996 बना दिया गया है। 1 जनवरी के आगे 6 को बड़े अक्षर में लिख दिया गया है जिससे वह 6। बन गया है। 6। / । ।995 और 6।/ । ।996 इस तरीके से बन गया है।
महत्वपूर्ण है कि डॉक्युमेंट्स में कई स्थानों पर काट-छांट होने और कुल 27 त्रुटियां पाई गयी हैं।
परवीन यादव ने वर्ष 2007 में गोपाल (ग्वाल-गवली) (NT-B) जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। 21 फरवरी 2007 को जारी जाति प्रमाणपत्र में, मुस्लिम श्रेणी के तहत परवीन यादव की जन्मतिथि 5 दिसंबर 1978 है। वहीं, स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में उनके पिता की जन्मतिथि 1 जून 1967 है। जन्मतिथि के हिसाब से परवीन यादव के पिता ताहेर मिया सय्यद 11 साल कुछ महीने की उम्र में पिता बन गए थे।
याचिका के अनुसार, वर्ष 2000 में परवीन यादव पुलिस कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुईं, 2003 में पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) की परीक्षा उत्तीर्ण की, 2007 में सहायक पुलिस निरीक्षक (API) बनीं और वर्तमान में वे बेगमपुरा पुलिस थाने में पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इसके पहले वे वेदांत नगर पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर थीं।
ABI (अकेला ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने जब परवीन यादव का पक्ष और हकीकत जानने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। इंस्पेक्टर परवीन यादव ने ABI को धमकी दी कि यदि वे झूठी जानकारी देकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास करेंगे तो वे उनके खिलाफ मानहानि का दावा करेंगी। साथ ही न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) के लिए भी आवेदन कर सकती हैं।
सोचने की बात है कि इंस्पेक्टर परवीन के पहले पिता ताहेरमिया सय्यद थे। बाद में ताराचंद यादव हो गए। नाम, सरनेम बदला जा सकता है पर पिता (का नाम) कैसे बदला जा सकता है। और ‘परवीन’ नाम तो मुस्लिम समुदाय में होता है। ‘यादव’ सरनेम हिन्दू में होता है। न्यायालय ने महाराष्ट्र राज्य पुलिस मुख्यालय (महानिदेशक) से भी ‘इंस्पेक्टर परवीन’ के बारे में जानकारी मांगी। लेकिन अभी तक महाराष्ट्र राज्य पुलिस मुख्यालय ने न्यायालय को जानकारी मुहैया नहीं कराई है।
