पाकिस्तान में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

 

विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे बड़ा आयोजन भले ही उड़ीसा के पुरी में होता हो, लेकिन यह वार्षिक रथ उत्सव पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू समुदाय द्वारा भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हर वर्ष श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और पारंपरिक शोभायात्राओं के माध्यम से उनकी आराधना करते हैं।

हर साल इस पर्व की शुरुआत स्नान पूर्णिमा से होती है। वर्ष 2026 में स्नान पूर्णिमा 29 जून को मनाई गई। इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का 108 कलशों के जल से विधिवत अभिषेक किया जाता है।

पाकिस्तान में भी विशेष रूप से सिंध प्रांत की राजधानी और देश के सबसे बड़े शहर कराची में इसका भव्य आयोजन होता है। कराची में यह आयोजन मुख्य रूप से श्री स्वामीनारायण मंदिर और रतन तलाव स्थित मरी माता मंदिर (अकबर रोड) के आसपास केंद्रित रहता है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं को सुंदर रथ पर विराजमान कर निर्धारित मार्गों से शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भगवान का गुणगान करते हैं। पुरुष, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में इस यात्रा में शामिल होकर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत वातावरण प्रस्तुत करते हैं।

इस रंगारंग धार्मिक आयोजन का संचालन पाकिस्तान के हिंदू समुदाय द्वारा किया जाता है, जिसमें इस्कॉन पाकिस्तान (ISKCON Pakistan) और पाकिस्तान न्यू वैकुंठ धाम भक्त समाज जैसी संस्थाएं भी प्रमुख भूमिका निभाती हैं। सैकड़ों श्रद्धालु सजे-धजे रथों को खींचते हैं, भक्ति गीत गाते हैं और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शोभायात्रा में भाग लेते हैं।

पाकिस्तान के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें अपनी धार्मिक परंपराओं को सार्वजनिक रूप से मनाने और समुदाय के बीच एकता को मजबूत करने का अवसर मिलता है। स्थानीय आयोजक, स्वयंसेवक और प्रशासन मिलकर कार्यक्रम के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करते हैं तथा प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

जगन्नाथ रथयात्रा हिंदू धर्म के सबसे श्रद्धेय उत्सवों में से एक है, जिसका मुख्य आयोजन उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से होता है। यह मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक है और भगवान विष्णु के स्वरूप भगवान जगन्नाथ को समर्पित है।

इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ विशाल लकड़ी के रथों में सवार होकर जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस भव्य रथयात्रा में भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

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