मुंबई के दादर निवासी 66 वर्षीय प्रोफेसर डॉ. पंकज के. फडणीस ने वीर सावरकर के पड़पोते सत्यकी सावरकर द्वारा कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में पुणे के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है। इस याचिका के माध्यम से फडणीस ने अदालत से अनुरोध किया है कि चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को शिकायत में लगाए गए आरोपों तक ही सीमित रखा जाए और इसे वीर सावरकर की ऐतिहासिक विरासत पर बहस का मंच न बनने दिया जाए।
अपनी याचिका में पंकज फडणीस ने अदालत से निर्देश देने की मांग की है कि दोनों पक्ष केवल वर्तमान शिकायत से जुड़े मुद्दों तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें और न्यायिक कार्यवाही को राजनीतिक मंच में तब्दील करने से बचें। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि रिकॉर्ड से उन सभी सवालों, जवाबों, टिप्पणियों और दस्तावेजों को हटाया जाए जो उनके अनुसार अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। वैकल्पिक रूप से उन्होंने अपनी हस्तक्षेप याचिका के साथ संलग्न वीर सावरकर से संबंधित सभी दस्तावेजी सामग्री को रिकॉर्ड पर लेने की मांग की है।
इसके अलावा पंकज फडणीस ने अदालत से शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को निर्देश देने का आग्रह किया है कि वे वीर सावरकर की तथाकथित “दया याचिकाओं (Mercy Petitions)” जैसे मुद्दे न उठाएं, क्योंकि उनके अनुसार इनका वर्तमान मानहानि मामले के निर्णय से कोई संबंध नहीं है।
पंकज फडणीस ने अदालत को बताया कि उन्होंने वीर सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान से संबंधित कई दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किए हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का वह पत्र भी शामिल है, जिसमें उन्होंने वीर सावरकर को “भारत का एक उल्लेखनीय पुत्र” बताया था।
उन्होंने वीर सावरकर की जन्मशती के अवसर पर भारत सरकार के फिल्म्स डिवीजन द्वारा बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री का भी उल्लेख किया और अपने पक्ष के समर्थन में उसे अदालत में प्रदर्शित करने की अनुमति मांगी है।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता और प्रतिवादी, दोनों ने उनके हस्तक्षेप के मुद्दे पर लगभग समान दलीलें दी हैं, जिससे अदालत का बहुमूल्य समय अनावश्यक रूप से खर्च हुआ है।
हलफनामे के अनुसार, ट्रायल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र केवल इस बात तक सीमित है कि राहुल गांधी से जुड़े कथित बयान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक मानहानि की श्रेणी में आते हैं या नहीं। इसमें कहा गया है कि अदालत का काम वीर सावरकर के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, उनकी ऐतिहासिक भूमिका या उनकी तुलना भगत सिंह जैसे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से करना नहीं है।
हलफनामे के मुताबिक, 1 जुलाई और 7 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई तथा मीडिया रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि मामला धीरे-धीरे वीर सावरकर की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका पर बहस का केंद्र बनता जा रहा है। पंकज फडणीस का तर्क है कि इस प्रकार की चर्चाएं, 1966 में निधन हो चुके वीर सावरकर पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने (“ट्रायल इन एबसेंटिया”) के समान हैं।
यह आपराधिक मानहानि मामला मार्च 2023 में राहुल गांधी द्वारा कथित रूप से दिए गए बयानों से जुड़ा है। आरोप है कि राहुल गांधी ने वीर सावरकर को ब्रिटिश शासन का सहयोगी बताया था और जेल में उनके द्वारा लिखी गई “दया याचिकाओं” का भी उल्लेख किया था।
इन बयानों को मानहानिकारक बताते हुए और यह आरोप लगाते हुए कि इससे वीर सावरकर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है।
