किरायेदारों की जानकारी न देने पर 170 मकान मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज

पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार

किरायेदारों की जानकारी पुलिस को नहीं देने वाले 170 से अधिक मकान मालिकों के खिलाफ पुणे पुलिस ने सीधे मामले दर्ज किया है। किरायेदार की पहचान, स्थायी पता और संपर्क संबंधी जानकारी पुलिस के पास दर्ज कराना अनिवार्य है।

पुलिस ने आशंका जताई है कि किरायेदारों का सत्यापन नहीं होने से शहर की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर किराए के मकानों में रहने का जोखिम बना हुआ है। पुणे में पहले भी किराए के मकानों में आतंकवादी कनेक्शन वाले संदिग्धों के रहने की बात सामने आ चुकी है।

पुलिस ने मकान किराए पर देते समय पहचान पत्र, स्थायी पता और संपर्क नंबर की उचित जांच करने की अपील की है। संदिग्ध जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करने का भी आग्रह किया है।

पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा) डॉ. प्रशांत अमृतकर ने जानकारी देते हुए कहा कि पुणे शहर में पिछले कुछ दिनों से किरायेदार सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। मकान मालिकों या पीजी संचालकों के लिए उनके यहां रहने वाले किरायेदारों, पीजी में रहने वाले मेहमानों अथवा छात्रों की जानकारी सरकारी पोर्टल या पुलिस तंत्र को ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन देना आवश्यक है।

डॉ. प्रशांत अमृतकर ने बताया कि विशेष रूप से विशेष शाखा की ओर से यह अभियान चलाया जा रहा है। बड़े स्तर पर किरायेदार सत्यापन के दौरान कई स्थानों पर खामियां सामने आई हैं। जहां जानबूझकर या अनजाने में नियमों का उल्लंघन हुआ है, वहां कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डॉ. प्रशांत अमृतकर ने बताया कि अब तक पुणे शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में लगभग 170 मकान मालिकों या पीजी संचालकों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

डॉ. डॉ. प्रशांत अमृतकर ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से किरायेदारों का सत्यापन होना और उनकी जानकारी पुलिस के पास उपलब्ध होना जरूरी है। पिछली कुछ घटनाओं के अनुभव को देखते हुए यह जानकारी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को देना आवश्यक है।

इसी उद्देश्य से BNSS की धारा 163 के तहत आदेश/नोटिस जारी किया गया है, जिसके अनुसार किरायेदारों की जानकारी देना अनिवार्य है। यह जानकारी पुलिस की खुफिया गतिविधियों तथा सुरक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ. प्रशांत अमृतकर ने नागरिकों से अपील की कि वे किरायेदारों की जानकारी अपने सरकारी पोर्टल, सिटीजन पोर्टल या स्थानीय पुलिस स्टेशन में अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं और पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।

किरायेदार सत्यापन अभियान की प्रक्रिया के बारे में प्रशांत अमृतकर ने बताया कि इसमें यह जांच की जाती है कि मकान मालिक ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है या नहीं और किरायेदार की जानकारी जमा की है या नहीं। यह सत्यापन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा रहा है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है।

जिन लोगों को किरायेदार की जानकारी देनी है, वे सिटीजन पोर्टल या पुलिस की वेबसाइट के माध्यम से जानकारी जमा कर सकते हैं। जिनका रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट हो चुका है, उनका एग्रीमेंट स्वतः पोर्टल के साथ सिंक हो जाता है और उसके आधार पर जानकारी अपलोड की जा सकती है। इसके अलावा जानकारी स्थानीय पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से भी जमा की जा सकती है।

पूरे पुणे शहर में यह कार्रवाई जारी है। मामला दर्ज होने के बाद संबंधित अपराध BNSS की धारा 223 के तहत दर्ज किया जाता है।

पुलिस के अनुसार, किरायेदार के साथ रेंट एग्रीमेंट करना और उसकी जानकारी पुलिस को देना दोनों अनिवार्य हैं।

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