मुंबई के उपनगर मुलुंड में रहने वाली 70 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका पहले कस्टम्स फ्रॉड में 70 हजार गंवा बैठीं। अपनी रकम वापस पाने के लिए ऑनलाइन मदद तलाशना उन्हें और बड़ी साइबर ठगी में ले गया, जहां आरोपियों ने टैक्स, जीएसटी, कानूनी फीस और अन्य शुल्क के नाम पर उनसे 14.38 लाख रुपये ठग लिए।
अकेली रहने वाली शिक्षिका को सितंबर 2025 में सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। उसने खुद को फ्लोरिडा में रहने वाला यूरोलॉजिस्ट डॉ. कृष्ण मोहन बताया और भरोसा जीतने के लिए अमेरिकी पासपोर्ट की कॉपी भी भेजी।
बातचीत के बाद उसने दावा किया कि वह दुबई जा रहा है, लेकिन अमेरिकी नियमों के कारण नकदी नहीं निकाल पा रहा। उसने 15 हजार रुपये मांगे, जो महिला ने भेज दिए। इसके बाद उसने दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम्स द्वारा पकड़े जाने और अमेरिकी डॉलर ले जाने के कारण जुर्माना भरने की बात कही। इस पर महिला ने 55 हजार रुपये और ट्रांसफर कर दिए।
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने कस्टम्स अधिकारी बनकर शिक्षिका को फोन किया और 1.55 लाख रुपये की मांग की। उसे बताया गया कि डॉ. कृष्ण मोहन करीब 40 हजार डॉलर लेकर आया है, जिसकी कीमत लगभग 37.79 लाख रुपये है। इस बार शिक्षिका को शक हुआ और उन्होंने आगे पैसे देने से इन्कार कर दिया।
जुलाई 2026 में महिला ने अपने गंवाए 70 हजार रुपये वापस पाने के लिए ऑनलाइन मदद तलाशनी शुरू की। इसी दौरान उन्हें ‘Luthra & Luthra Company’ का विज्ञापन मिला, जिसमें साइबर अपराध पीड़ितों का पैसा वापस दिलाने का दावा किया गया था।
विज्ञापन में दिए नंबर पर संपर्क करने पर एक व्यक्ति ने खुद को मददगार बताया और दावा किया कि उसने आरबीआई के एक अधिकारी से बात की है। शिक्षिका से खाता खोलने के नाम पर 10 हजार रुपये और जीएसटी के लिए 71 हजार रुपये मांगे गए। रकम लेने के बाद आरोपियों ने उन्हें ब्लॉक कर दिया।
इसके बाद शिक्षिका को सोशल मीडिया पर ‘Cyber Victim Support’ नाम से एक और विज्ञापन मिला। इस बार एक व्यक्ति ने खुद को विशेष अधिवक्ता बताया और कहा कि उनके खिलाफ दिल्ली साइबर पुलिस में मामला दर्ज है। फिर एक अन्य व्यक्ति ने दिल्ली साइबर पुलिस अधिकारी बनकर दावा किया कि उनकी मूल ठगी की रकम उनके नाम पर एक वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में निवेश की गई है।
आरोपियों ने शिक्षिका को एक कथित निवेश खाते के दस्तावेज भेजे, जिसमें 6.92 लाख रुपये की रकम दिखाई गई थी। इसे निकालने के लिए उनसे टैक्स, फीस और कानूनी खर्च के नाम पर लगातार भुगतान कराया गया।
पुलिस के अनुसार, 31 अगस्त तक शिक्षिका ने कुल 14.38 लाख रुपये आरोपियों को भेज दिए। जब वह खाते में दिखाई जा रही 6.92 लाख रुपये की रकम भी नहीं निकाल सकीं, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने ईस्ट रीजन साइबर पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
