जस्टिस अभय ओक
अकेला
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अभय ओक शनिवार, 24 मई 2025 को सेवानिवृत्त हो गए। उस दिन सेवानिवृत्ति ही अभय ओक के जीवन की बड़ी घटना नहीं थी। दो और बड़ी घटनाएं अभय ओक ने क्रिएट कर एक इतिहास रच दिया। गुरुवार देर शाम जस्टिस अभय ओक ने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया और अगले दिन शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में 11 फैसले सुनाये। इस दिन उनके कार्य दिवस का अंतिम दिन था।
जस्टिस अभय ओक की मां श्रीमती वासंती ओक कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। पिछले रविवार को जस्टिस अभय ओक CJI बी. आर. गवई के सम्मान में आयोजित समारोह में शामिल होने मुंबई आये थे। तब उन्होंने अस्पताल में अपनी मां से अंतिम बार मुलाकात की थी। गुरुवार को उनकी मां का निधन हो गया। गुरुवार देर शाम मुंबई के पास ठाणे में उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया। गुरुवार को ही वे दिल्ली लौट गए।
जस्टिस अभय ओक ने शुक्रवार को अपनी नियमित बेंच में बैठकर 11 फैसले सुनाए। इन फैसलों में एक महत्वपूर्ण स्वतः संज्ञान (सुओ-मोटो) मामला भी शामिल था, जो किशोरों की गोपनीयता के अधिकार से जुड़ा है। फिर चीफ जस्टिस (सीजेआई) के साथ औपचारिक बेंच में बैठे। यह एक नई परंपरा थी। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) की ओर से 21 मई को आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस अभय ओक ने कहा था कि वह सेवानिवृत्त होने वाले जजों के अंतिम कार्य दिवस पर काम न करने की परंपरा से सहमत नहीं हैं।
जस्टिस अभय ओक का जन्म 25 मई 1960 को हुआ था। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलएम किया और 28 जून, 1983 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास डब्ल्यू ओक के चैंबर में ठाणे जिला न्यायालय में अभ्यास शुरू किया। 1985-86 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जज और पूर्व लोकायुक्त वीपी टिपणिस के चैंबर में काम किया। वह 29 अगस्त 2003 को बॉम्बे हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज बने और 12 नवंबर 2005 को स्थायी जज बनाए गए। उन्होंने 10 मई 2019 को कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली, जहां उन्होंने तब तक सेवा दी, जब तक कि वह 31 अगस्त 2021 को भारत के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत नहीं हुए।

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