आरोपी की 27 बार टाली जमानत, सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट पर हुआ नाराज़

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका को 27 बार टालने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पर नाराजगी जताई और आरोपी को जमानत दे दी। चीफ जस्टिस बीआर गवई ने सवाल किया कि आरोपी चार साल से जेल में है, हाईकोर्ट कुछ भी तय नहीं कर रहा है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामले में 27 बार इसे स्थगित कर दिया है। पिछले 27 मौकों पर हाईकोर्ट ने कुछ नहीं किया है। आप 28वें मौके पर उससे क्या उम्मीद करते हैं?”

यह केस केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के जिम्मे है। आरोपी लक्ष्य तंवर पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगे हैं। धारा 419 (छल से पहचान बदलकर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती सुरक्षा दस्तावेज़ की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में उपयोग करना), और 120B (आपराधिक साजिश)। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 13(1)(d) और 13(2) भी लगाई गई हैं। हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि लक्ष्य तंवर के खिलाफ पहले से 33 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही, CBI को निर्देश दिया गया था कि वह शिकायतकर्ता संजय कुमार यादव की उपस्थिति सुनिश्चित करे ताकि आगे देरी न हो। आरोपी का क्रिमिनल बैकग्राउंड भी लंबा है। हाईकोर्ट के मुताबिक उसके खिलाफ पहले से 33 मामले दर्ज हैं। बावजूद इसके, जब मामला जमानत पर सुनवाई का आया, तो कोर्ट ने 27 बार सुनवाई टाल दी। इससे सुप्रीम कोर्ट खासा नाराज हुआ।

CJI बीआर गवई और एजी मसीह की पीठ ने 21 अप्रैल को इस आधार पर नोटिस जारी किया था कि याचिकाकर्ता 4 साल से अधिक समय से जेल में बंद है और जमानत के लिए केस 27 मौकों पर टाला गया था। जब मामले की सुनवाई हुई तो याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में होनी है। हालांकि, यह 28वीं बार होगा, जब मामला सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि वो 3 साल, 8 महीने और 24 दिन से हिरासत में हैं।

दरअसल, हाईकोर्ट के 20 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए निर्देश दिया था कि शिकायतकर्ता के साक्ष्य दर्ज किए जाएं। याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराध के आरोप शामिल हैं. जबकि सीबीआई ने जमानत दिए जाने का पुरजोर विरोध किया, इस आधार पर कि याचिकाकर्ता 33 अन्य मामलों में शामिल है। इस पर जस्टिस गवई ने सवाल किया कि वह चार साल से जेल में है, हाईकोर्ट कुछ भी तय नहीं कर रहा है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामले में 27 बार इसे स्थगित कर दिया है। पिछले 27 मौकों पर हाईकोर्ट ने कुछ नहीं किया है। आप 28वें मौके पर उससे क्या उम्मीद करते हैं?”

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