पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों पर ईद के दौरान कठोर प्रतिबंध लगाए गए हैं। सिंध और पंजाब प्रांतों में जारी नए फरमान के अनुसार, उन्हें ईद की नमाज पढ़ने, कुरबानी देने, और मस्जिदों में जाने से मना किया गया है। घरों में भी ईद के रीति-रिवाजों पर रोक है। किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का जुर्माना और गिरफ्तारी होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान (जेएपी) ने दावा किया है कि पाकिस्तान में पुलिस अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के लोगों को एक हलफनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर रही है। इसमें कहा गया है कि वे ईद-उल-अजहा के अवसर पर पशुओं की कुर्बानी नहीं देंगे। वकीलों के एक संगठन ने मांग की है कि अहमदिया समुदाय के लोग अपने घरों में भी कुर्बानी नहीं कर सकते हैं और अगर वे ऐसा करते हैं तो पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस ने कई जगहों पर अहमदिया मुसलमानों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया है।
ये अत्याचार पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के साथ दशकों से जारी है। साल 1974 में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की सरकार ने अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित किया था, जिसके बाद से उनके खिलाफ लगातार उत्पीड़न जारी है। गौरतलब है कि अहमदिया समुदाय खुद को मुसलमान मानता है, लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने इस समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक बाद उन्हें न सिर्फ खुद को मुसलमान कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, बल्कि इस्लाम के कई रस्मों का पालन करने से भी रोक दिया गया।
