तेरहवीं में रायता से खाने से 200 लोगों को एंटी-रेबीज़ का टीका लगवाया गया

सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले के उझानी कोतवाली क्षेत्र के पिपरौल गांव में तेरहवीं के भोज में रायता खाने के बाद क़रीब 200 लोगों को एंटी-रेबीज़ का टीका लगवाना पड़ा। दरअसल, उन्हें बाद में पता चला कि रायता बनाने के लिए जिन भैंसों के दूध का इस्तेमाल किया गया था, उनमें से एक भैंस की कुत्ता काटने से मौत हो गई थी और उसमें रेबीज़ के लक्षण दिखाई दिए थे।

घटना के मुताबिक़, 23 दिसंबर 2025 को गांव में एक व्यक्ति की तेरहवीं के मौक़े पर भोज का आयोजन किया गया था। इस भोज में खाने के साथ रायता भी परोसा गया था। भोज के बाद जानकारी मिली कि जिस भैंस के दूध का इस्तेमाल रायता बनाने के लिए किया गया था, उसे कुत्ते ने काटा था, उस भैंस को कुछ समय तक अलग रखा गया था, लेकिन उसके दूध को अन्य भैंसों के दूध के साथ मिला दिया गया। 26 दिसंबर 2025 को उसी भैंस की मौत हो गई और उसमें रेबीज़ के लक्षण भी दिखे थे। उसके बाद 27 दिसंबर को गांववालों ने उझानी के सरकारी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज़ का टीका लगवाना शुरू किया।

बदायूं अस्पताल के सीएमओ रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 27 दिसंबर को गांव पहुंचकर लोगों को समझाया कि घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन वैक्सीन की सभी डोज़ समय पर लगवाना बेहद ज़रूरी है।

इस बीच गोरखपुर से भी ऐसी ख़बर आई है, जहां क़रीब 200 लोगों ने एंटी-रेबीज़ का टीका लगवाया है। गोरखपुर के उरुवा ब्लॉक के रामडीह गांव में रेबीज़ संक्रमित गाय की मौत हो गई थी। संबंधित गाय के कच्चे दूध का इस्तेमाल गांव के किसी कार्यक्रम में किया गया था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक़, इस दूध का सेवन क़रीब 200 लोगों ने किया था। गाय को तीन महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था और बाद में उसमें असामान्य और आक्रामक व्यवहार दिखाई देने लगा था। डॉक्टरों ने बाद में इन लक्षणों को रेबीज़ से जोड़कर देखा था। गाय की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दूध पीने वाले सभी लोगों को एंटी-रेबीज़ का टीका लगाने की सलाह दी थी। उरुवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के इंचार्ज डॉक्टर एपी सिंह ने बताया कि अब तक 170 से अधिक लोगों को वैक्सीन डोज़ दी गई है।

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