सर्वोच्च न्यायालय ने भी खारिज की अबू सालेम की जमानत याचिका

 

सर्वोच्च न्यायालय ने भी गैंगस्टर अबू सालेम की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “आपको टाडा (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम) के तहत सजा मिली है। आप समाज का कोई भला करने के लिए जेल में नहीं हैं।” कोर्ट ने कहा कि सजा की गणना और दस्तावेजों के आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ही मामले की सुनवाई करे। अंतरिम जमानत या जल्द सुनवाई के लिए भी हाई कोर्ट में अपील करने को कहा।

1993 बॉम्बे ब्लास्ट के आरोपी अबू सालेम को साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण संधि के अनुसार उसने अपनी 25 साल की सजा पूरी कर ली है। उसे बॉम्बे ब्लास्ट में आजीवन कारावास की सजा हुई है।

अबू सालेम ने 10 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में इमर्जेन्सी पैरोल याचिका खारिज कर दी थी। अपने भाई की मौत के अंतिम संस्कार में वह वह अपने पैतृक गांव उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जाना चाहता था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी याचिका यह कह कर निरस्त कर दी थी कि वह पुलिस एस्कॉर्ट का चार्ज 17.60 लाख रुपये भरने में असमर्थ है। वह सिर्फ एक लाख रुपये ही भरने के लिए तैयार था।

इसके बाद अबू सालेम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अबू सालेम की तरफ से ऋषि मल्होत्रा ने पैरवी की। अदालत ने अबू सालेम के वकील से कहा कि वह अंतरिम जमानत के लिए हाई कोर्ट में आवेदन करें क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस समय जमानत याचिका पर विचार नहीं कर सकता। बेंच ने साफ किया कि जब जेल प्रशासन का हलफनामा पहले से ही हाई कोर्ट में मौजूद है तो वह अदालत खुद मामले की मेरिट देखेगी। वकील के बार-बार जल्दी सुनवाई के अनुरोध पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कोई रियायत नहीं दी। कोर्ट का रुख सख्त रहा कि टाडा के तहत सजा पाए अपराधी को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

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