बॉम्बे हाई कोर्ट ने सलमान खान के पनवेल फार्महाउस के पड़ोसी से सलमान खान के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा

 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेता सलमान खान के पनवेल फार्महाउस के पड़ोसी से कहा कि वह सलमान खान के खिलाफ किए गए अपने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर विचार करें। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया तक पहुंच होने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति मशहूर हस्तियों समेत किसी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री पोस्ट कर सकता है।

अदालत ने सवाल किया कि अपनी शिकायतें संबंधित अधिकारियों के सामने रखने के बजाय कोई व्यक्ति ऐसी सामग्री सोशल मीडिया पर क्यों अपलोड करता है।

पनवेल में सलमान खान के फार्महाउस से सटी संपत्ति के मालिक केतन कक्कड़ ने आरोप लगाया था कि अभिनेता ने फार्महाउस के निर्माण के दौरान पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया और पड़ोसी की संपत्ति तक जाने का रास्ता रोक दिया। केतन कक्कड़ ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद सलमान खान ने शहर की सिविल कोर्ट में केतन कक्कड़ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। सलमान खान का आरोप था कि केतन कक्कड़ ने सोशल मीडिया पर फार्महाउस से जुड़ी उनकी गतिविधियों को लेकर वीडियो और अन्य सामग्री अपलोड की।

सलमान खान ने दावा किया कि ये पोस्ट मानहानिकारक हैं। उन्होंने केतन कक्कड़ द्वारा अपलोड किए गए कथित आपत्तिजनक वीडियो हटाने और भविष्य में इस तरह की टिप्पणियां करने से रोकने के लिए अदालत से आदेश मांगा था।

हालांकि सिविल कोर्ट ने ऐसा आदेश देने से इन्कार कर दिया, जिसके बाद सलमान खान ने हाई कोर्ट का रुख किया।

हाई कोर्ट में दायर याचिका में सलमान खान ने कहा कि केतन कक्कड़ की पोस्ट न केवल मानहानिकारक हैं, बल्कि उनके खिलाफ सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाली भी हैं।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मिला देशमुख ने सवाल किया कि कोई व्यक्ति अपनी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों के सामने रखने के बजाय सोशल मीडिया पर वीडियो और सामग्री क्यों डालता है।

जस्टिस शर्मिला देशमुख ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति के पास सोशल मीडिया की सुविधा है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी भी व्यक्ति — चाहे वह आम नागरिक हो या सेलिब्रिटी — को बदनाम करने के लिए वीडियो अपलोड कर सकता है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो क्यों डालने चाहिए?”

जस्टिस शर्मिला देशमुख ने कहा कि पक्षकारों को अपने विवादों को सोशल मीडिया पर लड़ने से बचना चाहिए और उचित कानूनी मंचों पर समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने केतन कक्कड़ को विवाद से जुड़े ट्वीट और वीडियो हटाने पर विचार करने का सुझाव भी दिया।

अदालत ने नाराजगी जताते हुए यह भी पूछा कि क्या न्यायिक समय केवल इस बात का फैसला करने में खर्च होना चाहिए कि कोई सोशल मीडिया पोस्ट मानहानिकारक है या नहीं और उसे हटाया जाना चाहिए या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि यदि सामग्री किसी तीसरे पक्ष द्वारा अपलोड की गई हो, तब भी उसे हटाने के लिए संबंधित माध्यमों के जरिए कदम उठाए जा सकते हैं।

पीठ ने केतन कक्कड़ को सामग्री हटाने पर विचार करने का सुझाव दिया और मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की।

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