हेमंत करकरे
अकेला
महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के मुखिया हेमंत करकरे कर्नल प्रसाद पुरोहित का खंडाला में इन्कॉउंटर करनेवाले थे। ATS के ही एक अधिकारी की इन्पुट पर कर्नल प्रसाद पुरोहित बंगले से बाहर नहीं निकले और बच गए।
अब तक आपने पढ़ा कि मिलिट्री इंटेलीजेन्स के कर्नल आरके श्रीवास्तव कर्नल प्रसाद पुरोहित को धोखे से पंचमढ़ी (मध्य प्रदेश) से मुंबई लेकर आये। यहां उन्हें मुंबई एयरपोर्ट के बाहर पहले से ही खड़े इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी संजय गर्ग और ATS के अधिकारियों के हवाले कर दिया। ATS अधिकारियों ने कर्नल प्रसाद पुरोहित को एक सफ़ेद रंग की टाटा सूमो में बोरे की तरह ठूंस दिया। अब पढ़िए कि टाटा सूमो में लादने के बाद वे कर्नल प्रसाद पुरोहित को पुणे के पास खंडाला लेकर गए। खंडाला में उन्हें एक बंगले में रखा। बंगला किसका था नहीं मालूम। तारीख थी 29 अक्टूबर 2008। एक और तारीख-3 नवम्बर 2008– को ध्यान में रखियेगा। 3 नवम्बर 2008 की तारीख का आगे की न्यूज़ (भाग-6) से बड़ा कनेक्शन है।
खंडाला के उस बंगले में मिलिट्री इंटेलीजेंस कर्नल आरके श्रीवास्तव, IB अधिकारी संजय गर्ग के अलावा ATS मुखिया हेमंत करकरे, ATS के 6 अन्य कॉन्स्टेबल्स और SID का एक अधिकारी मौजूद थे। कर्नल प्रसाद पुरोहित ने देखा कि उस कमरे में बड़ी सी टीवी लगी हुई थी। टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ आ रही थी कि मालेगाँव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित और कुछ मिलिट्री अधिकारियों का हाथ है। ब्रेकिंग न्यूज़- ATS ने मालेगाँव ब्लास्ट केस सॉल्व कर लिया है।
किसी का इशारा मिलते ही दो कॉन्स्टेबल्स ने कर्नल प्रसाद पुरोहित को रस्सी से कुर्सी में बाँध दिया। 29 अक्टूबर 2008 की रात से 3 नवम्बर 2008 की सुबह तक आरके श्रीवास्तव और हेमंत करकरे ने कर्नल प्रसाद पुरोहित की जमकर पिटाई की। ATS के कॉन्स्टेबल्स भी बीच-बीच में पीट लेते थे। आरके श्रीवास्तव ने कुछ ज़्यादा ही पिटाई की। जानवरों की तरह। आरके श्रीवास्तव, संजय गर्ग, हेमंत करकरे कर्नल प्रसाद पुरोहित को इसलिए पीटते थे कि वे बता दें कि (1) उनका इंटेलीजेन्स नेटवर्क क्या है, (2) सोर्स (इन्फॉर्मर) के नाम और लिस्ट क्या है, (3) इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक, ISI और SIMI के बारे में इन्फॉर्मेशन देने वाले कौन-कौन हैं, (4) वे क़ुबूल कर लें कि मालेगाँव में ब्लास्ट उन्होंने किया था। ब्लास्ट के मास्टरमाइंड वही हैं। (5) यह भी क़ुबूल कर लें कि मालेगाँव ब्लास्ट में RSS, VHP और उत्तर प्रदेश के भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ शामिल थे।
बेइंतहां पिटाई के बावज़ूद कर्नल प्रसाद पुरोहित ने कुछ भी कबूल नहीं किया। 3 नवम्बर 2008 की अपराह्न हेमंत करकरे ने कर्नल प्रसाद पुरोहित से कहा कि तुम्हारे बारे में जो इन्फॉर्मेशन थी वह गलत थी। मालेगाँव ब्लास्ट में तुम्हारा कोई रोल नहीं है। तुम निर्दोष हो। अब फ्री हो। जा सकते हो।
कर्नल प्रसाद पुरोहित की चल पाने की स्थिति नहीं थी। जम्मू-कश्मीर में पोस्टिंग के दौरान एक ऑपरेशन में उनके घुटनों में गहरी चोट लग गयी थी। ATS अधिकारियों की पिटाई से वह घाव फिर हरा हो गया था। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मैं चल नहीं पा रहा हूँ। मुझे कोई वाहन दे दो। नज़दीक के बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन तक छुड़वा दो। इस पर हेमंत करकरे ने कहा कि तुम्हारे बैग में व्हील लगी है। इसे खींचते हुए आसानी से ले जा सकते हो। बस स्टॉप भी यहां से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है।
शाम लगभग 7 बजे वहां अनामी राय आ गए। अनामी राय तब राज्य के पुलिस महानिदेशक थे। अनामी राय ने भी कर्नल प्रसाद पुरोहित पर यह कहते हुए दबाव डाला कि तुम अब फ्री हो। जा सकते हो। जल्दी जाओ। अनामी राय और कर्नल प्रसाद पुरोहित एक दूसरे को पहचानते थे। कर्नल प्रसाद पुरोहित ने अनामी राय से निवेदन किया कि वे राज्य पुलिस मुख्यालय, कुलाबा जा रहे हैं तो उन्हें भी अपनी कार में बैठाकर ले चलें। परन्तु अनामी राय तेजी से कमरे से बाहर निकल गए। वे वही IPS अनामी राय हैं जिनकी छवि एक पुलिस अधिकारी की कम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता की ज़्यादा थी। अनामी राय को खुद को उत्तर भारतीय बताने में शर्म आती थी। वे राय (Rai) की जगह रॉय (Roy) लिखते थे। जिससे लगे कि वे उत्तर भारतीय नहीं बंगाली हैं। अनामी राय को किससे क्या बात करनी चाहिए, कैसे करनी चाहिए, इसकी तमीज़ बिल्कुल नहीं थी।
रात के 9 बज गए थे। कर्नल प्रसाद पुरोहित ने देखा कि मिलिट्री, IB और ATS के बड़े अधिकारी बंगले में नहीं थे। कर्नल प्रसाद पुरोहित अपना बैग लेकर निकलने ही वाले थे कि अचानक एक ATS अधिकारी उनके कमरे में आ गया। उसने अंदर से दरवाज़ा बंद करते हुए कर्नल प्रसाद पुरोहित से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि सर, आज आप बाहर बिल्कुल मत जाइये। बस स्टॉप पर आपका इन्कॉउंटर होने वाला है। ATS अधिकारियों ने बस स्टॉप के आसपास इन्कॉउंटर की पोजीशन ले ली है। कर्नल प्रसाद पुरोहित सिहर गए। उस ATS अधिकारी (ABI के पास नाम मौजूद है) की बात मान बाहर नहीं गए। इन्कॉउंटर में मारे जाने से बच गए।
मुंबई से 200 किलोमीटर दूर नासिक जिले के उपनगर मुस्लिम बहुल इलाके मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बम ब्लास्ट हो गया था। इस ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे। क्रमशः …
