महाराष्ट्र के बारामती में एक बैंक मैनेजर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मैनेजर ने फांसी बैंक की शाखा में ही लगायी। आत्महत्या से पूर्व लिखे पत्र में उन्होंने काम के प्रेशर को आत्महत्या करने का कारण बताया है।
बैंक मैनेजर की पहचान शिवशंकर मित्रा के रूप में हुई है। वे बारामती के भीगवान रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के ब्रांच मैंनेजर थे। उन्होंने अपने केबिन में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताते हैं शिवशंकर मित्रा ने 11 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों और कार्यभार का हवाला देते हुए बैंक के मुख्य प्रबंधक पद से इस्तीफा दे दिया था। वे नोटिस पीरियड पूरा कर रहे थे। बैंकिंग समय समाप्त होने के बाद, शिवशंकर मित्रा ने सभी कर्मचारियों को शाखा बंद करने की बात कहकर जाने को कहा। चौकीदार रात करीब 9:30 बजे चला गया। शिवशंकर मित्रा ने पहले अपने एक सहकर्मी से रस्सी लाने को कहा था। रात करीब 10 बजे उन्होंने रस्सी से फांसी लगा ली। यह घटना बैंक के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है।
जब शिवशंकर मित्रा घर नहीं लौटे और न ही उन्होंने फोन का जवाब दिया, तो उनकी पत्नी आधी रात के आसपास बैंक पहुंची। उन्होंने बैंक की लाइटें जलती हुई पाईं। अंदर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर, उन्होंने बैंक कर्मचारियों को सूचित किया। जब शाखा खोली गई, तो मित्रा छत से लटके हुए पाए गए।
घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में शिवशंकर मित्रा ने काम के दबाव को अपने इस कदम का कारण बताया है। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि कर्मचारी अपना 100 फीसदी देकर काम करते हैं। उन पर काम का अतिरिक्त दबाव न डालें। शिव शंकर मित्रा ने सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि मैं यह कदम अपने होशोहवास में उठा रहा हूं। हो सके तो उनकी आंखें दान कर दी जाएं।
