NIA कोर्ट ने ड्राइवर मनीष सोनी की कबूलनामा वापस लेने की अर्जी फिर खारिज की, मनसुख हिरेन की हत्या के समय मनीष सोनी ही कार चला रहा था

 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए गए मामलों की विशेष अदालत ने हाल ही में 2021 के एंटीलिया बम धमकी और व्यवसायी मनसुख हिरेन हत्या मामले में ड्राइवर मनीष सोनी द्वारा अपने कबूलनामे को वापस लेने की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस विषय पर पहले ही फैसला हो चुका है और किसी नई परिस्थिति के अभाव में इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।

याचिकाकर्ता मनीष वसंतभाई सोनी पर आरोप है कि उसने उस कार को चलाया था जिसमें कारोबारी मनसुख हिरेन की कथित रूप से हत्या की गई थी। मनीष सोनी ने अपने ऊपर दर्ज कबूलनामे को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह बयान स्वेच्छा से नहीं दिया गया था, बल्कि उसे और उसके परिवार को धमकाकर और दबाव डालकर दर्ज कराया गया था।

हालांकि, 7 मार्च को अदालत ने कहा कि मनीष सोनी ने फरवरी 2025 में भी इसी तरह की अर्जी दाखिल की थी, जिसे पहले ही निपटा दिया गया था। उस समय अदालत ने कहा था कि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कबूलनामे को वापस लेने का सवाल और उसके कानूनी प्रभाव पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।

विशेष न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने नई अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि इसमें केवल पहले लगाए गए दबाव और धमकी के आरोपों का विस्तार किया गया है और ऐसी कोई नई परिस्थिति सामने नहीं आई है, जिससे मामले पर पुनर्विचार किया जा सके।

न्यायाधीश ने कहा, “जब यह अदालत किसी एक आरोपी की किसी विशेष प्रार्थना पर फैसला दे चुकी है, तो पर्याप्त और संतोषजनक कारण के बिना उसी अदालत के सामने वही प्रार्थना दोबारा नहीं उठाई जा सकती।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित रूप से कबूलनामा वापस लेने के मुद्दे की जांच अन्य साक्ष्यों के साथ मुकदमे के अंतिम निर्णय के समय की जाएगी।

यह मामला फरवरी 2021 की उस सनसनीखेज घटना से जुड़ा है, जब दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से भरी एक SUV खड़ी मिली थी। महिंद्रा स्कॉर्पियो गाड़ी में अंबानी और उनकी पत्नी के नाम धमकी भरा पत्र भी मिला था, जिससे शहर में बड़ा सुरक्षा अलर्ट पैदा हो गया था।

यह गाड़ी ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन की बताई गई थी, जिन्होंने कुछ दिन पहले इसके चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। 4 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन लापता हो गए थे और अगले दिन उनका शव ठाणे जिले की एक खाड़ी से बरामद हुआ। इसके बाद आरोप लगे कि बम धमकी की साजिश से जुड़े इस मामले के तहत उनकी हत्या की गई।

शुरुआत में इस मामले की जांच मुंबई पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में इसे NIA को सौंप दिया गया। एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराएं लगाई थीं। चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि पूर्व सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाझे और अन्य सह-आरोपियों ने मिलकर अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरी गाड़ी रखने की साजिश रची और बाद में मनसुख हिरेन की हत्या करवाई।

सचिन वाझे और मनीष सोनी के अलावा इस मामले में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा, कई अन्य पुलिसकर्मी और कुछ नागरिक भी आरोपी हैं, जिन पर साजिश और उसके बाद की घटनाओं में भूमिका निभाने का आरोप है।

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