सचिन वाझे मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने 2021 के अंटीलिया विस्फोटक मामले और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत मंजूर कर दी है। मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी प्रदीप शर्मा, सुनील माने और रियाजुद्दीन काजी सहित अधिकांश आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। विशेष अदालत ने 1 अगस्त को इस मामले के आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत हत्या, जबरन वसूली, सबूत नष्ट करने और आपराधिक साजिश रचने जैसे…
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एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों पर आरोप तय
सचिन वाझे ‘एंटीलिया’ विस्फोटक और कार व्यापारी मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब पांच साल बाद इस मामले में API सचिन वाझे, PI प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अब सभी आरोपियों के खिलाफ नियमित मुकदमे की सुनवाई शुरू होगी। उनके विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इनके खिलाफ हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश और यूएपीए के तहत आतंकवादी…
Read MoreNIA कोर्ट ने ड्राइवर मनीष सोनी की कबूलनामा वापस लेने की अर्जी फिर खारिज की, मनसुख हिरेन की हत्या के समय मनीष सोनी ही कार चला रहा था
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए गए मामलों की विशेष अदालत ने हाल ही में 2021 के एंटीलिया बम धमकी और व्यवसायी मनसुख हिरेन हत्या मामले में ड्राइवर मनीष सोनी द्वारा अपने कबूलनामे को वापस लेने की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस विषय पर पहले ही फैसला हो चुका है और किसी नई परिस्थिति के अभाव में इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता। याचिकाकर्ता मनीष वसंतभाई सोनी पर आरोप है कि उसने उस कार को चलाया था जिसमें कारोबारी मनसुख हिरेन की कथित रूप…
Read Moreसर्वोच्च न्यायालय ने सर्वोच्च उद्योगपति मुकेश अम्बानी की सुरक्षा हटाने की याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता को जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी
देश की सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सर्वोच्च उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार को दी गई ‘जेड प्लस’ सुरक्षा हटाने की याचिका को शुक्रवार को सख्ती से खारिज कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता बिकाश साहा को चेतावनी देते हुए कहा कि बार-बार इसी तरह की निराधार याचिकाएं दायर करना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और भविष्य में ऐसा करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब त्रिपुरा हाई कोर्ट ने जून 2022 में गृह मंत्रालय को आदेश दिया था कि…
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