बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वझे को मिली जमानत रद्द कर दी। सचिन वझे 2021 के एंटीलिया बम धमकी मामले और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में आरोपी है।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। NIA ने विशेष NIA अदालत की ओर से 29 सितंबर 2026 को सचिन वझे को दी गई जमानत को चुनौती दी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसके अगले ही दिन जमानत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद से सचिन वझे ठाणे सेंट्रल जेल में बंद है।
पीठ ने कहा, “विशेष अदालत के विवादित आदेश को रद्द कर निरस्त किया जाता है। NIA की अपील स्वीकार की जाती है।” हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं हुई है।
25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ के पास विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी बरामद हुई थी। इस वाहन पर चोरी होने से पहले मनसुख हिरेन का कब्जा था। बाद में 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव ठाणे की एक खाड़ी में मिला था। NIA ने उसी साल 13 मार्च 2021 को सचिन वझे को गिरफ्तार किया था।
अपनी अपील में NIA ने दावा किया था कि विशेष अदालत का फैसला तथ्यों और कानून, दोनों ही लिहाज से पूरी तरह गलत है। NIA की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि कथित आतंकी साजिश में सचिन वझे की भूमिका बेहद अहम थी। उसने एक उद्योगपति मुकेश अम्बानी के आवास के पास विस्फोटकों से भरी गाड़ी खड़ी की थी, जिसका मकसद दहशत फैलाना था। उन्होंने मनसुख हिरेन की हत्या से जुड़े आरोपों का भी हवाला दिया।
वहीं, सचिन वझे को जमानत देते समय विशेष अदालत ने कहा था कि जांच एजेंसी आतंकवाद से जुड़े आरोपों को प्रथम दृष्टया साबित करने में नाकाम रही है। NIA ने इस आदेश को गैरकानूनी और कानूनी रूप से गलत करार दिया था।
NIA ने विशेष अदालत की ओर से जांच प्रक्रिया पर की गई टिप्पणियों को भी चुनौती दी थी। खास तौर पर कुछ लोगों के बयान दर्ज नहीं किए जाने को लेकर अदालत की आलोचना पर NIA ने आपत्ति जताई थी। वकील ने कहा कि NIA ने तीन सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए थे। उन्होंने दलील दी कि विशेष अदालत ने इस मामले में अनावश्यक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने यहां तक सवाल उठाया था कि क्या NIA इन लोगों के बयान दर्ज करने के लिए किसी ‘मुहूर्त’ का इंतजार कर रही थी।
NIA ने यह भी दावा किया था कि विशेष अदालत ने मामले का आंकलन करते समय एक ‘प्रमुख संरक्षित गवाह’ की गवाही को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। NIA ने हाई कोर्ट से जमानत का आदेश रद्द करने के साथ ही उस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी।
गौरतलब है कि विशेष NIA अदालत ने सचिन वझे को जमानत देते हुए कहा था कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास जिलेटिन की छड़ों से भरी गाड़ी खड़ी करने का कृत्य आतंकवादी गतिविधि की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने यह भी माना था कि ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या का एंटीलिया बम धमकी मामले से कोई संबंध नहीं था।
