एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों पर आरोप तय

सचिन वाझे

एंटीलिया’ विस्फोटक और कार व्यापारी मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब पांच साल बाद इस मामले में API सचिन वाझे, PI प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अब सभी आरोपियों के खिलाफ नियमित मुकदमे की सुनवाई शुरू होगी। उनके विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

इनके खिलाफ हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश और यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य और आतंकवादी साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा। NIA का आरोप है कि आरोपियों ने एक “आतंकवादी गिरोह” बनाकर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया।

NIA के अनुसार इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य मास्टरमाइंड सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वाझे था।
* विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो कार को मुंबई के कारमाइकल रोड पर पार्क किया गया था।
* सचिन वाझे का मकसद अपनी पुरानी “सुपर कॉप” वाली छवि दोबारा स्थापित करना था।
* कार कारोबारी मनसुख हिरेन ने विस्फोटकों की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने से इन्कार कर दिया।
* इससे षड्यंत्र के उजागर होने का खतरा पैदा हो गया, जिसके बाद सचिन वाझे और उसके सहयोगियों ने उनकी हत्या कर दी।
* घटना के बाद डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR), सीसीटीवी फुटेज और मनसुख हिरेन का मोबाइल फोन नष्ट कर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।

NIA द्वारा अदालत में आरोप पढ़े जाने के बाद सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया। अब मामले की अगली सुनवाई में गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर नियमित ट्रायल चलेगा।

यह मामला दक्षिण मुंबई स्थित उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर 25 फरवरी 2021 को मिली एक लावारिश स्कॉर्पियो कार से जुड़ा है। कार में जिलेटिन की 20 छड़ें और एक धमकी भरा पत्र मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी।

जांच के दौरान, 5 मार्च 2021 को स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी में रहस्यमय परिस्थितियों में मिला। इसके बाद उनके परिवार ने आरोप लगाया कि सचिन वाझे और उसके साथियों ने ही उनकी हत्या की है। इस आरोप के बाद राज्य सरकार और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

शुरुआत में इस मामले की जांच महाराष्ट्र एटीएस (ATS) कर रही थी। लेकिन जांच में लगातार हो रहे खुलासों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया। जांच के दौरान NIA ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें प्रमुख हैं- सचिन वाझे, इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा, विनायक शिंदे, नरेश गोर, रियाजुद्दीन काजी तथा अन्य आरोपी, जिनकी कुल संख्या 10 है।

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