बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फहीम अंसारी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने जीविकोपार्जन के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने हेतु पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) देने की मांग की थी। फहीम अंसारी 26/11 आतंकी हमले के मामले में बरी हो चुके हैं। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और रंजीतसिंह भोंसले की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि संबंधित प्राधिकरण द्वारा प्रमाणपत्र देने से इन्कार करना उचित था। विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
फहीम अंसारी ने पिछले वर्ष जनवरी में यह याचिका दायर की थी, जब उनके आरटीओ बैज और परमिट के लिए आवश्यक पीसीसी आवेदन को खारिज कर दिया गया था। प्राधिकरण ने उन्हें आरटीआई के जवाब में बताया था कि लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन से कथित संबंधों के आरोपों के कारण उन्हें यह प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता। पिछले वर्ष सितंबर में सरकार ने फहीम अंसारी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह अभी भी निगरानी में हैं, इसलिए प्रमाणपत्र देने से इन्कार उचित है। अपनी याचिका में फहीम अंसारी ने इस फैसले को “मनमाना, अवैध और भेदभावपूर्ण” बताते हुए कहा कि इससे उनके जीविकोपार्जन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।
26 नवंबर 2008 को दस पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई के महत्वपूर्ण स्थानों—छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ताज और ओबेरॉय होटलों सहित—पर हमले किए थे। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। ये हमले लगभग 60 घंटे तक चले थे। नौ आतंकी मारे भी गए थे। मई 2010 में एक विशेष अदालत ने हमलों के दौरान जिंदा पकड़े गए एकमात्र पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को दोषी ठहराया था, जबकि साक्ष्यों के अभाव में दो भारतीय आरोपियों—फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद—को बरी कर दिया था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके बरी होने के फैसले को बरकरार रखा।
हालांकि, फहीम अंसारी को उत्तर प्रदेश के एक अन्य मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें 10 साल की सजा हुई थी। सजा पूरी करने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। अपनी याचिका में फहीम अंसारी ने कहा कि उन्हें इस आधार पर प्रमाणपत्र देने से मना किया गया कि उन पर आतंकी संगठन का सदस्य होने का आरोप था। याचिका में कहा गया, “याचिकाकर्ता को कानूनन बिना किसी बाधा के रोजगार करने का अधिकार है।” सिर्फ इस कारण कि उन पर 26/11 मामले में मुकदमा चला, यह उनके रोजगार के अवसरों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकता, खासकर तब जब उन्हें सभी अदालतों ने बरी कर दिया है।
फहीम अंसारी ने अदालत से प्राधिकरण को उन्हें पीसीसी जारी करने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका के अनुसार, 2019 में जेल से रिहा होने के बाद फहीम अंसारी ने मुंबई में एक प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी की थी, जो कोविड-19 महामारी के दौरान बंद हो गई। इसके बाद उन्होंने ठाणे जिले के मुंब्रा में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम शुरू किया, लेकिन कम आय के कारण उन्होंने तीन पहिया ऑटो-रिक्शा लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जो उन्हें 1 जनवरी 2024 को मिल गया। इसके बाद उन्होंने पीसीसी के लिए आवेदन किया, जो व्यावसायिक रूप से ऑटो चलाने के लिए अनिवार्य है।
जब उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन किया, जिसके जवाब में बताया गया कि उन्हें यह प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता क्योंकि उन पर लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य होने का आरोप था। अभियोजन के अनुसार, अंसारी और अहमद ने शहर के नक्शे तैयार कर उन्हें पाकिस्तान में बैठे कथित साजिशकर्ताओं और मास्टरमाइंड को सौंपा था। हालांकि, सत्र अदालत ने उन्हें बरी करते हुए कहा था कि इससे बेहतर नक्शे इंटरनेट पर उपलब्ध थे।
