एक महानगरीय मजिस्ट्रेट अदालत ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को 66 वर्षीय चालक पी. नारायणासामी पूसरिपडैयाची को लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने का दोषी ठहराया है। आरोपी रेलवे कमिश्नर कार्यालय में कार्यरत था। उसकी लापरवाही के कारण 25 वर्षीय निधि जेठमलानी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं और मई 2017 में हुए सड़क हादसे के बाद वे वेजिटेटिव स्टेट में चली गई थीं।
अदालत ने नरमी बरतते हुए आरोपी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि जमा किए जाने पर पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। अदालत ने कहा कि आरोपी पहली बार अपराध में दोषी पाया गया है, घटना को आठ साल से अधिक समय बीत चुका है और वह पहले ही लंबे ट्रायल की प्रक्रिया से गुजर चुका है। कोर्ट ने उसके पारिवारिक हालात को भी ध्यान में रखा और कहा कि यह एक बार की चूक का मामला है, इसलिए नरमी बरतना उचित है।
यह हादसा 28 मई 2017 को हुआ था। निधि जेठमलानी Marine Plaza Hotel के पास मरीन ड्राइव पर सड़क पार कर रही थीं। वह 12वीं कक्षा में एडमिशन के लिए के. सी. कॉलेज जा रही थीं। उन्हें वेस्टर्न रेलवे की एक इनोवा कार ने टक्कर मार दी, जिसे पी. नारायणासामी पूसरिपडैयाची चला रहा था। हादसे में उनके सिर और कमर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया। बाद में उनके मित्र चिराग मारू ने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
साल 2021 में Motor Accident Claims Tribunal (MACT) ने पीड़िता को ब्याज सहित 69.92 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही भविष्य के इलाज के लिए 1.5 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी मंजूर किया गया था।
वेस्टर्न रेलवे ने इस आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया कि हादसे में पीड़िता की भी लापरवाही थी। रेलवे का कहना था कि वह मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रही थीं और पैदल यात्रियों के लिए सिग्नल लाल था। यह मामला फिलहाल हाई कोर्ट में लंबित है।
फरवरी 2022 में ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें अभियोजन पक्ष ने चार गवाह पेश किए। इनमें चिराग मारू, एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी और मेडिकल विशेषज्ञ शामिल थे।
चिराग मारू ने अदालत को बताया कि वाहन लगभग 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा था और उसने निधि जेठमलानी को टक्कर मारी। एक अन्य चश्मदीद श्रेयस प्रकाश पालकर ने कहा कि हादसा ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर हुआ था और उस समय पैदल यात्रियों के लिए ग्रीन सिग्नल था। मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. विजया कुमार ने गंभीर चोटों की पुष्टि की।
आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने का दावा किया, लेकिन अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुप्रिया निकम ने यह दलील खारिज कर दी। मजिस्ट्रेट सुप्रिया निकम ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों से किसी दुश्मनी या झूठे फंसाने की कोई वजह सामने नहीं आई। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी सरकारी रेलवे वाहन चला रहा था, इसलिए उसे झूठा फंसाए जाने की संभावना कम है।
वेजिटेटिव स्टेट, जिसे अब Unresponsive Wakefulness Syndrome (UWS) भी कहा जाता है, मस्तिष्क की गंभीर क्षति से जुड़ी स्थिति है. इसमें व्यक्ति की आंखें खुली रहती हैं और वह जागता हुआ दिखाई देता है, लेकिन उसे अपने आसपास की कोई समझ या जागरूकता नहीं होती. मरीज खुद सांस ले सकता है, उसकी दिल की धड़कन सामान्य रह सकती है और कभी-कभी शरीर में अनैच्छिक हरकतें भी दिखती हैं. लेकिन वह किसी को पहचान नहीं पाता, बात नहीं कर पाता और न ही किसी निर्देश का पालन करता है. यह स्थिति कोमा से अलग होती है, क्योंकि कोमा में व्यक्ति पूरी तरह बेहोश रहता है और आंखें भी नहीं खुलतीं. अगर यह अवस्था लंबे समय तक बनी रहे तो इसे Persistent Vegetative State (PVS) कहा जाता है. गंभीर सिर की चोट, स्ट्रोक, ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन इंफेक्शन या ड्रग ओवरडोज जैसी घटनाएं इसके बड़े कारण माने जाते है।
