दाऊदी बोहरा समुदाय का फैसला सुनाने वाले जज को पत्र से धमकी

 

बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल ने रविवार को मुंबई के गाँवदेवी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। न्यायाधीश गौतम पटेल ने साल 2024 में दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार विवाद से जुड़े विवाद में फैसला सुनाया था। पत्र में फैसले का ज़िक्र है।

FIR के अनुसार, न्यायमूर्ति गौतम पटेल और उनके परिवार को पिछले 10 महीनों में कई गुमनाम धमकी भरे पत्र मिले। 5 जून को मामला तब और गंभीर हो गया जब जर्मनी की डाक मुहर वाला एक बेहद धमकी भरा पत्र उनकी बेटी के लंदन स्थित निवास पर पहुँचा। पत्र में उनके जीवन को खतरा बताया गया और दावा किया गया कि परिवार के खिलाफ “कॉन्ट्रैक्ट” जारी किया गया है। पत्र के साथ एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस भी भेजी गई थी, जिसे अब लंदन पुलिस को सौंप दिया गया है।

धमकी देने वालों ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश से मांग की थी कि वे यूट्यूब पर एक वीडियो पोस्ट करें, जिसमें वे अपने फैसले के लिए माफी माँगें और सैयदना के उत्तराधिकार और उपाधि संबंधी निर्णय को वापस लें। उनका दावा था कि यह फैसला “दबाव और मजबूरी” में दिया गया था।

कुछ धमकी भरे पत्र मुंबई स्थित न्यायमूर्ति पटेल के घर भी भेजे गए, जिन्हें उनकी पत्नी ने प्राप्त किया।

पिछले सप्ताह, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के ब्रिटेन दौरे के दौरान उन्होंने यह मामला भारत के उच्चायुक्त पी कुमारन के समक्ष उठाया, जिसके बाद लंदन पुलिस ने न्यायमूर्ति गौतम पटेल और उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई। इसके बाद उच्चायुक्त ने संबंधित अधिकारियों से बात कर पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया।

24 अप्रैल 2024 को न्यायमूर्ति गौतम पटेल की एकल पीठ ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय का 53वाँ दाई अल-मुतलक मानते हुए उनके पक्ष को बरकरार रखा था और कहा था कि उनके पास वैध ‘नस्स’ (उत्तराधिकार की धार्मिक घोषणा) है।

न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने 2014 में दायर उस मुकदमे को खारिज कर दिया था, जिसे शुरुआत में खुज़ैमा कुतुबुद्दीन ने दायर किया था। यह मामला उनके भाई और तत्कालीन सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के जनवरी 2014 में 102 वर्ष की आयु में निधन के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद बुरहानुद्दीन के दूसरे पुत्र मुफद्दल सैफुद्दीन 53वें सैयदना बने।

2016 में कुतुबुद्दीन के निधन के बाद उनके बेटे ताहेर फखरुद्दीन ने मुकदमे को आगे बढ़ाया और दावा किया कि उनके पिता ने उन्हें उत्तराधिकार का अधिकार सौंपा था।

अपने फैसले में न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने कहा था कि वादी यह साबित करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके कि 52वें दाई ने कुतुबुद्दीन को ‘नस्स’ प्रदान किया था।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल 25 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त हो गए।

बाद में वादियों ने इस उत्तराधिकार संबंधी फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी, जहाँ यह मामला फिलहाल लंबित है।

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