दीपक सिंह और कमलेश तिवारी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उर्फ़ बाबा ने अपराध और अपराधियों का प्रदेश से लगभग सफाया कर दिया है। बाबा की क्रियाशैली से पुलिस विभाग में ‘सिंघम’ तो अपराधियों में ‘बुलडोज़र’ शब्द का प्रादुर्भाव हुआ है। लेकिन उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मड़ियाहू पुलिस स्टेशन पहुंचते-पहुंचते दोनों शब्द (सिंघम और बुलडोज़र) टें हो गए हैं। यहाँ एक पुलिस कांस्टेबल पुलिस स्टेशन में जमा पिस्तौल को भाड़े पर देता है और एक ब्याजखोर उस पिस्तौल से डराकर लोगों से हफ्ता वसूलता है।
पुलिस कांस्टेबल का नाम है कमलेश तिवारी और ब्याजखोर (जिसे आप भू माफिया भी कह सकते हैं) का नाम दीपक सिंह वल्द मनबोध सिंह है। दीपक सिंह के खिलाफ मड़ियाहू पुलिस स्टेशन में अट्रोसिटी (SC/ST) एक्ट के तहत FIR दर्ज है। दीपक सिंह का भाई आनंद सिंह भी उसकी सभी कारगुजारियों में शामिल है।
सुभाषपुर गांव का निवासी दीपक सिंह बेरोज़गार है। परन्तु उसकी कमाई ज़ोरों पर है। वह ब्याज पर पैसा देने का काम करता है। दीपक सिंह ब्याज पर दिए पैसे वसूलने के लिए पिस्तौल से लोगों को धमकाता है। गांव में यदि दो लोग जमीन (खेत) की खरीद-फरोख़्त करते हैं तो दीपक सिंह उन्हें खरीद-फरोख़्त नहीं करने देता। पिस्तौल से धमकाकर हफ्ता (कट) मांगता है। दीपक सिंह कहता है कि कोई भी ज़मीन की खरीदी-बिक्री बिना उसकी इज़ाज़त के नहीं कर सकता। लोग शिकायत करने मड़ियाहू पुलिस स्टेशन जाते हैं तो कांस्टेबल कमलेश तिवारी उन्हें भगा देता है। लोग दीपक सिंह के घर जाते हैं तो वह उन पर चार पालतू कुत्ते छोड़ देता है।
दीपक सिंह के पिता मनबोध सिंह सेना में नायब सूबेदार थे। मनबोध सिंह के पास लाइसेंसी (लाइसेंस नंबर-3489-84 और शस्त्र नंबर-4445) पिस्तौल थी। इसी पिस्तौल से दीपक सिंह लोगों को धमकाता था। मई 2021 में मनबोध सिंह की मौत हो गयी। उनकी मौत के आठ महीने बाद दीपक सिंह ने पिस्तौल को मड़ियाहू पुलिस स्टेशन में जमा कर दिया।
आश्चर्य की बात है कि पिस्तौल ऑन रिकॉर्ड पुलिस स्टेशन में जमा है। बावज़ूद इसके दीपक सिंह उसी पिस्तौल से लोगों को धमकाता है। ब्याज़ की किश्त वसूलता है और ज़मीन की खरीद-बिक्री करने वालों से हफ्ता वसूलता है। लोगों ने पता किया तो कांस्टेबल कमलेश तिवारी ऑफ़ रिकॉर्ड पिस्तौल को दीपक सिंह को दे देता है और उसके बदले दीपक सिंह से ‘किराया’ (रिश्वत) लेता है।
मुंबई में रहने वाले राम फेर सिंह ने दीपक सिंह के खिलाफ 26 शिकायतें की हैं। पुलिस प्रशासन ने किसी भी शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया। इसी तरह विजय सिंह, उमाशंकर सिंह, शेरू सिंह सहित 11 लोगों ने दीपक सिंह और कमलेश तिवारी के खिलाफ शिकायतें की हैं।
पुलिस स्टेशन में जमा पिस्तौल से धमकाने की शिकायत कुछ लोगों ने कोर्ट में की। कोर्ट के आदेश पर मड़ियाहू पुलिस ने लिखित में बताया कि पिता मनबोध सिंह की मौत (मई 2021) के आठ महीने बाद दीपक सिंह (चुनाव के मद्देनज़र) ने जनवरी 2022 में पिस्तौल को पुलिस स्टेशन में जमा कर दिया था। रिकॉर्ड यह भी बताता है कि नवम्बर 2024 में दीपक सिंह ने पिस्तौल ले लिया था और 10 जून 2025 को वापस जमा कर दिया। मड़ियाहू थाना इंचार्ज दीपेन्द्र सिंह, उप निरीक्षक नानू यादव और उप निरीक्षक प्रसिद्ध सिंह के पास इस सवाल का जवाब नहीं होता कि जब पिस्तौल दीपक सिंह की नहीं है। उसके बाप मनबोध सिंह की थी तब दीपक सिंह पिस्तौल पुलिस स्टेशन से कैसे विद्ड्रॉ करता है।
सुभाषपुर वालों के लिए राहत की खबर ये है कि कमलेश तिवारी का फिलहाल सिकरहरा पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर हो गया है।
मड़ियाहू पुलिस स्टेशन की हद में रहने वालों ने ‘बुलडोज़र बाबा’ से निवेदन किया है कि वे भू माफिया दीपक सिंह, हेड कांस्टेबल कमलेश तिवारी, थाना इंचार्ज दीपेंद्र सिंह, उप निरीक्षक नानू यादव और उप निरीक्षक प्रसिद्ध सिंह की कारगुजारियों की तरफ भी ध्यान दें। नानू यादव और प्रसिद्ध सिंह लोगों के आवेदनों को दबा देते हैं अथवा FIR दर्ज करने से पहले निरस्त कर देते हैं।
