महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को विधानसभा को बताया कि मालाड पश्चिम स्थित रिजॉइस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित एक प्रार्थना सभा के दौरान चमत्कारी उपचार (फेथ हीलिंग) के दावों और अंधविश्वास को बढ़ावा देने की शिकायतों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है तथा विस्तृत जांच जारी है।
गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अतुल भातखलकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। अतुल भातखलकर ने 10 मई 2026 को स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कथित धर्मांतरण के प्रयासों से जुड़े आरोपों पर सरकार से विवरण मांगा था।
अतुल भातखलकर ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान एक वक्ता ने लोगों के सिर पर हाथ रखकर बीमारियां ठीक करने और व्यक्तिगत कष्ट दूर करने का दावा किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वक्ता ने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और लोगों को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि स्कूल में हर रविवार ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इन आरोपों पर जवाब देते हुए डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच की। जांच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला कि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रतिभागी पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला गया हो या उसे इसके लिए प्रेरित किया गया हो।
हालांकि, जांच में यह सामने आया कि शिकायतकर्ता को कथित तौर पर घर में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें न रखने की सलाह दी गई थी। जांच में यह भी पाया गया कि कार्यक्रम के दौरान चमत्कारी रूप से बीमारियां ठीक होने और कष्ट दूर होने के जो दावे किए गए, वे अंधविश्वास को बढ़ावा देने की श्रेणी में आते हैं।
इन निष्कर्षों के आधार पर मालाड पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा महाराष्ट्र मानव बलि एवं अन्य अमानवीय, अनिष्ट, अघोरी प्रथाओं और काला जादू निवारण एवं उन्मूलन अधिनियम के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है।
गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विधानसभा को यह भी बताया कि राज्य सरकार स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी कि भविष्य में स्कूल परिसरों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित न हों। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
