रुक्मिणीबाई अस्पताल के डॉटर ने बच्चे के शरीर में तोड़ दी एंटी-रेबीज इंजेक्शन की सुई

 

कल्याण के एक ढाई वर्षीय बच्चे को रविवार को अपने पालतू कुत्ते के काटने के बाद उसे एंटी-रेबीज के कई इंजेक्शन लगाए गए, लेकिन इनमें से एक इंजेक्शन लगाते समय सिरिंज की सुई टूट गई और उसके शरीर के अंदर ही फंस गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने इस घटना को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया, जिसके कारण बच्चा कई घंटों तक तेज दर्द से तड़पता रहा। बाद में उसे दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां सर्जरी कर उसके शरीर से टूटी हुई सुई निकाली गई।

कल्याण (पूर्व) निवासी ढाई वर्षीय कविश को उसके पालतू कुत्ते ने खेलते समय काट लिया। इसके बाद उसके माता-पिता सूर्यभान और काजल उसे कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) द्वारा संचालित रुक्मिणीबाई अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने कविश को एंटी-रेबीज उपचार की सलाह दी। इसके बाद एक नर्स ने बच्चे को तीन इंजेक्शन लगाए—दो हाथों में और एक जांघ में। साथ ही कूल्हे के पास एक स्थान पर अगला इंजेक्शन लगाने के लिए निशान भी लगाया।

काजल का आरोप है कि इंजेक्शन लगाते समय सुई टूट गई और उसका हिस्सा बच्चे के शरीर में ही फंस गया। काजल कहना है कि डॉक्टर ने इस घटना के लिए बच्चे के इंजेक्शन के दौरान हिलने-डुलने को जिम्मेदार ठहराया। बाद में कराए गए एक्स-रे में यह भी सामने आया कि शरीर के अंदर फंसी सुई मुड़ गई थी।

काजल ने बताया कि उन्होंने तुरंत डॉक्टर को इसकी जानकारी दी, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि टूटी हुई सुई का हिस्सा जमीन पर गिर गया होगा। इसके बाद कविश को घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ ही देर में इंजेक्शन वाली जगह पर उसे असहनीय दर्द होने लगा। परिजनों ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

निजी अस्पताल में किए गए एक्स-रे में पुष्टि हुई कि टूटी हुई सुई बच्चे के शरीर के अंदर फंसी हुई है। इसके बाद डॉक्टरों ने एक छोटी सर्जरी कर सुई को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया।

मंगलवार को काजल दोबारा रुक्मिणीबाई अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसी घटना न हो। उन्होंने निजी अस्पताल में इलाज पर हुए खर्च की भरपाई के लिए मुआवजे की भी मांग की। उनका आरोप है कि डॉक्टर की कथित लापरवाही के कारण ही उन्हें अतिरिक्त इलाज के लिए निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा।

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