उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे लगाने के मामले में TISS मुंबई के 2 छात्रों को जमानत से इन्कार

 

मुंबई की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के सात छात्रों को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि दो अन्य छात्रों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इन छात्रों पर दिवंगत कार्यकर्ता जी.एन. साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र होने और उमर खालिद तथा शरजील इमाम की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगाने का मामला दर्ज किया गया था।

कामाख्या दास और अभिरूप पॉल की याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि आम तौर पर किसी दिवंगत व्यक्ति को श्रद्धांजलि देते समय “रेस्ट इन पीस” (Rest in Peace) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन इस मामले में आरोपियों ने “रेस्ट इन पावर (1967–फॉरएवर)” (Rest in Power – 1967–Forever) शब्दों का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के पास से मिली अन्य सामग्री के साथ इसे देखते हुए उनके आचरण को लेकर संदेह पैदा होता है।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच के दौरान पुलिस ने कामाख्या दास और अभिरूप पॉल के पास से लैपटॉप और मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन उपकरणों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्यों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की प्रतियां मिलीं और उनमें मौजूद कई सामग्री कथित तौर पर डिलीट की गई थी।

अदालत ने कामाख्या दास और अभिरूप पॉल की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा- इसमें कोई संदेह नहीं कि केवल किसी माओवादी संगठन द्वारा प्रकाशित किताबें डाउनलोड करना अपने आप में अपराध नहीं होगा। हालांकि, ये किताबें सरकार द्वारा प्रतिबंधित नहीं हैं, लेकिन कथित तौर पर इनमें भारत के विभाजन के लिए लोगों को उकसाने या सहायता करने की क्षमता है। इस पृष्ठभूमि में, इन किताबों को डाउनलोड करने के पीछे कामाख्या दास की मंशा और इसके साथ दो व्यक्तियों की रिहाई के समर्थन में नारे लगाने की उनकी मंशा का पता लगाने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

हालांकि, अदालत ने उत्कर्ष खोंटिया, यश कौंडिल्य, अवंतिका, इशप्रीत कौर, निकिता मोनिका डिसूजा, हार्दिका भगत और सत्यम यादव की अग्रिम जमानत याचिकाएं मंजूर कर लीं।

इन छात्रों के खिलाफ TISS प्रशासन की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, 12 अक्टूबर 2025 को 10 से 12 छात्रों का एक समूह प्रशासन की पूर्व अनुमति के बिना TISS परिसर में एक छात्रावास के सामने एकत्र हुआ था।

आरोप है कि छात्रों ने साईबाबा की तस्वीर के पास मोमबत्तियां जलाकर, उनकी कविताएं पढ़कर और “रेस्ट इन पावर (1967 से हमेशा के लिए)” का संदेश प्रदर्शित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

छात्रों पर उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगाने का भी आरोप है।

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