मुंबई की लोकल ट्रेनों में बढ़ते यात्रियों के साथ अब रेलवे के सामने टिकट धोखाधड़ी की एक नई डिजिटल चुनौती खड़ी हो गई है। फर्जी रेलवे टिकट, AI की मदद से तैयार किए गए टिकटों की तस्वीरें और नकली मोबाइल ऐप के बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने मुंबई के उपनगरीय नेटवर्क पर टिकट जांच कर्मचारियों की संख्या लगभग दोगुनी करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है।
मुंबई की लोकल ट्रेनों में प्रतिदिन 65 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। इनमें करीब 35 से 38 लाख यात्री मध्य रेलवे और 28 से 30 लाख यात्री पश्चिम रेलवे की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल मध्य रेलवे के पास लगभग 1,400 टिकट जांच कर्मचारी, जबकि पश्चिम रेलवे के पास करीब 1,100 कर्मचारी हैं। रेलवे बोर्ड के मानकों के अनुसार प्रत्येक 1,000 यात्रियों पर एक टिकट जांच कर्मचारी होना चाहिए।
इसी मानक के आधार पर मध्य रेलवे ने अपनी संख्या बढ़ाकर करीब 2,800 करने की मांग की है। वहीं पश्चिम रेलवे ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर लगभग 2,300 से 2,400 करने का प्रस्ताव दिया है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक समस्या केवल कर्मचारियों की कमी तक सीमित नहीं है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ टिकट जालसाज भी नए तरीके अपना रहे हैं।
फर्जी टिकट, AI से तैयार या बदले गए टिकट के स्क्रीनशॉट और आधिकारिक ऐप जैसे दिखने वाले नकली टिकटिंग एप्लिकेशन के कारण टिकट जांच कर्मचारियों के सामने नई चुनौती पैदा हो गई है। कम कर्मचारियों के कारण स्टेशनों, लोकल ट्रेनों, एसी लोकल, फर्स्ट क्लास और अन्य डिब्बों में लगातार जांच करना भी मुश्किल हो रहा है।
इस डिजिटल धोखाधड़ी का एक मामला 20 जून को मुंबई की एसी लोकल ट्रेन में सामने आया। नियमित टिकट जांच के दौरान एक टिकट चेकर को एक यात्री के मोबाइल में मौजूद RailOne जैसा दिखने वाला संदिग्ध एप्लिकेशन दिखाई दिया। यात्री ने डिजिटल टिकट दिखाया, जो पहली नजर में असली लग रहा था। लेकिन जब टिकट की जांच हैंड हेल्ड टर्मिनल (HHT) से की गई, तो मामला संदिग्ध निकला। जांच में सामने आया कि स्क्रीन पर दिखाया गया UTS नंबर दो दिन पहले जारी किए गए पुराने सेकंड क्लास टिकट का था। इसके बाद कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
इस घटना ने रेलवे अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है कि आने वाले समय में ऐसे नकली ऐप और AI से तैयार डिजिटल टिकटों का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।
रेलवे का मानना है कि अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति से बिना टिकट यात्रा के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जा सकेगा। पीक ऑवर, त्योहारों और विशेष जांच अभियानों के दौरान अधिक टीमों को तैनात किया जा सकेगा।
इसके अलावा एसी लोकल, फर्स्ट क्लास और आरक्षित डिब्बों में भी विशेष टीमों के जरिए ज्यादा प्रभावी जांच की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक अतिरिक्त कर्मचारियों से मौजूदा टिकट जांच स्टाफ पर काम का दबाव भी कम होगा। वर्तमान में कर्मचारियों को लगातार टिकट जांच अभियानों के साथ-साथ विभिन्न विशेष ड्यूटी में भी लगाया जाता है।
यदि रेलवे बोर्ड इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क में टिकट जांच व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ फर्जी टिकटों, AI से तैयार टिकटों और अनधिकृत टिकटिंग ऐप के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।
मुंबई की लोकल में डिजिटल टिकटिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रेलवे के लिए चुनौती अब सिर्फ यह पता लगाना नहीं है कि यात्री के पास टिकट है या नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई दे रहा टिकट वास्तव में असली है या AI और तकनीक की मदद से तैयार किया गया फर्जी टिकट।
