‘गुजरात में ऑपरेशन गंगाजल’ : सरकार ने दो IAS अधिकारियों को दी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

 

गुजरात सरकार ने गुरुवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो अधिकारियों के. राजेश और गौरव दहिया को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। 2011 बैच के IAS अधिकारी के. राजेश पहले से ही निलंबित थे। रिश्वतखोरी, अवैध भूमि आवंटन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आपराधिक मामलों और कानूनी कार्यवाही के बीच उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।

गुजरात सरकार ‘ऑपरेशन गंगाजल’ नामक अभियान के तहत भ्रष्टाचार के आरोपों, अनुशासनात्मक कार्रवाई और गंभीर कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों की समीक्षा कर रही है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2022 में सुरेंद्रनगर के कलेक्टर के रूप में अप्रैल 2018 से जून 2021 तक कार्यकाल से जुड़े एक भ्रष्टाचार मामले में के. राजेश को गिरफ्तार किया था। 2011 बैच के IAS अधिकारी के. राजेश पहले से ही निलंबित थे। रिश्वतखोरी, अवैध भूमि आवंटन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आपराधिक मामलों और कानूनी कार्यवाही के बीच उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई। के. राजेश पर हथियारों के लाइसेंस जारी करने और सरकारी जमीन आवंटित करने के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगा था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दर्ज की।

23 मार्च 1986 को जन्मे के. राजेश ने पांडिचेरी विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में BTech की डिग्री हासिल की। UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद वह 2011 में IAS में शामिल हुए थे।

गुजरात सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, IAS गौरव दहिया को उनके करियर के दौरान हुई कई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों, विवादों और कदाचार संबंधी जांच के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई। इनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में उनके कार्यकाल से जुड़े मामले भी शामिल थे। अगस्त 2019 में गौरव दहिया को निलंबित कर दिया गया था। राज्य की जांच समिति ने दिल्ली की एक महिला द्वारा लगाए गए बहुविवाह और पेशेवर कदाचार के आरोपों में प्रथमदृष्टया आधार पाया था। इसके बाद सरकार ने औपचारिक विभागीय जांच के आदेश दिए थे।

गौरव दहिया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि उन्हें हनी-ट्रैप में फंसाया गया और ब्लैकमेल किया गया। बाद में दिल्ली पुलिस ने महिला द्वारा दर्ज शिकायत में उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि, गुजरात सरकार ने उस समय कहा था कि उनके खिलाफ अलग-अलग शिकायतों को लेकर विभागीय जांच जारी थी। नवंबर 2019 में राज्य सरकार ने गौरव दहिया के वित्तीय लेन-देन की भी जांच के आदेश दिए। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी वी.एस. गढ़वी को उनके वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें दिल्ली में उक्त महिला के लिए एक फ्लैट खरीदने से संबंधित लेन-देन भी शामिल था।

गुजरात सरकार ने जुलाई 2023 में गौरव दहिया का निलंबन समाप्त कर दिया था। उनका निलंबन लगभग चार साल तक चला। इसके बाद उन्हें गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया। गुरुवार को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने तक वह इसी पद पर कार्यरत थे। गौरव दहिया की सेवानिवृत्ति के समय उम्र 42 वर्ष थी। उन्हें वर्ष 2044 में सेवानिवृत्त होना था, यानी उनकी सेवा के लगभग 18 वर्ष अभी बाकी थे।

3 जून 1984 को जन्मे दहिया ने 2007 में दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से MBBS की पढ़ाई पूरी की। UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद वह 2010 में IAS में शामिल हुए थे। अपने करियर के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य और पर्यावरण विभागों में काम किया और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा वह बनासकांठा और पाटन के जिला विकास अधिकारी भी रह चुके हैं।

Leave a Comment