आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस तरलादा राजशेखर राव ने एक जूनियर वकील को 24 घंटे की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस पर CJI सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस टी. राजशेखर राव और जूनियर वकील के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल होने और बार काउंसिल की शिकायत के बाद CJI ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक वायरल वीडियो ने देश के कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया है। माय लॉर्ड के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते एक जूनियर वकील और गुस्से से लाल न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव के बीच जो कुछ भी हुआ उसने अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे दी है। तनाव इतना गहरा गया कि मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को खुद इस मामले की कमान संभालनी पड़ी है। CJI ने जज को रिपोर्ट तलब करने पर मजबूर कर दिया।
यह मामला तब शुरू हुआ जब एक रिट याचिका (लुकआउट नोटिस और पासपोर्ट जब्त करने के खिलाफ) पर सुनवाई चल रही थी। महज 2 साल का अनुभव रखने वाले एक वकील के व्यवहार से नाराज होकर न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव ने उन्हें 24 घंटे की पुलिस हिरासत में भेजने का मौखिक आदेश दे दिया।
जज ने वकील के व्यवहार को अकर्मण्य यानी आलस्य से भरा बताया। वीडियो में जज टी. राजशेखर राव को यह कहते सुना जा सकता है कि वकील ने कोर्ट में बंडल (फाइल) फेंका और वरिष्ठ वकील की तरह व्यवहार करने की कोशिश की।
न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव ने कहा- अभी आपके पास 10 साल का अनुभव भी नहीं है और आप बंडल फेंक रहे हैं? अब आपको दर्द महसूस होगा। उन्होंने रजिस्ट्रार को तत्काल हिरासत का आदेश जारी करने का निर्देश दिया। अधिवक्ता हाथ जोड़कर माफी मांगते रहे और दया की भीख मांगते दिखे लेकिन जज टी. राजशेखर राव ने उन्हें बार काउंसिल जाकर धरना देने की नसीहत दे डाली।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की। जिसके बाद CJI ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
जैसे ही यह खबर फैली आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी न्यायाधीश टी. राजशेखर राव के चैंबर में पहुंचे। उनके अनुरोध के बाद न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव ने लिखित आदेश पर हस्ताक्षर होने से पहले ही अपना निर्देश वापस ले लिया।
