इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी संपत्ति मामले में जांच रिपोर्ट मांगी, CBI, ED और SFIO को 8 हफ्तों में जवाब देने का निर्देश

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को आरोपों की जांच कर आठ सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ ने कर्नाटक भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

यह पूरा मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दायर की गई एक आपराधिक रिट याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। दरअसल, इस संवेदनशील मामले की सुनवाई बीते 12 मई को कोर्ट के चैंबर में गोपनीय तरीके से हुई थी, जिसके बाद गुरुवार को हाईकोर्ट का यह आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

एस. विग्नेश शिशिर का दावा है कि राहुल गांधी ने अपनी कमाई के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा कर रखी है। याचिका में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर लगाया गया है। आरोप के मुताबिक पिछले 22 सालों में राहुल गांधी ने कुल 54 विदेश यात्राएं की हैं, जिन पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह भारी-भरकम खर्च राहुल गांधी की घोषित आय से बिल्कुल मेल नहीं खाता है। गौरतलब है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार राहुल गांधी ने अपनी कुल चल और अचल संपत्ति लगभग 20.39 करोड़ रुपये घोषित की थी।

एस. विग्नेश शिशिर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके परिवार के सदस्यों के पास घोषित आय की तुलना में अधिक संपत्ति है और मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की। सुनवाई के दौरान CBI और ED की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और वे कानून के अनुसार आरोपों का सत्यापन करेंगे। अदालत ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यकता पड़ने पर उचित कार्रवाई की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने एस. विग्नेश शिशिर की उस मांग को भी स्वीकार कर लिया, जिसमें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाने की मांग की गई थी। अदालत ने सभी पक्षों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को होगी। वहीं, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए याचिका से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत की सीलबंद अभिरक्षा में रखे जाएंगे।

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