बॉम्बे हाईकोर्ट ने पवई के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले में एक डेवलपर को धमकाने और उससे वसूली करने के लिए गैंगस्टर रवि पुजारी के साथ कथित साजिश रचने के आरोप में दो बिल्डरों- राजन सुजनानी और किशोर वतनानी- के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत दाखिल चार्जशीट को रद्द करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान एकत्रित सामग्री से प्रथम दृष्टया जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) का मामला बनता है।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति आर.आर. भोंसले की खंडपीठ ने डेवलपर्स राजन सुजनानी और किशोर वतनानी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में उन्होंने अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट और रवि पुजारी गैंग से कथित संबंधों के आधार पर MCOCA लगाए जाने को चुनौती दी थी।
खंडपीठ ने कहा, “हमारा मत है कि प्रथम दृष्टया यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि याचिकाकर्ताओं ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से गैरकानूनी गतिविधियों में भाग लिया।”
यह मामला सितंबर 2013 का है, जब डेवलपर कमल शेठ ने पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी कि राजन सुजनानी, किशोर वतनानी और अन्य लोग पवई स्थित एक विवादित जमीन को लेकर उन्हें धमका रहे हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजन सुजनानी का दावा था कि कमल शेठ ने संपत्ति की पूरी कीमत का भुगतान नहीं किया है और उन्होंने कथित तौर पर कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए कमल शेठ की बात रवि पुजारी से करवाई। आरोप है कि उस कॉल के दौरान रवि पुजारी ने बकाया भुगतान को लेकर कमल शेठ को गालियां दीं और धमकाया।
कमल शेठ ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन आए, जिनमें एक कॉल रवि पुजारी की भी थी, जिसमें उनसे पैसे मांगे गए और धमकियां दी गईं।
हालांकि मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इस मामले में ‘ए समरी’ रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन कमल शेठ ने इसे ट्रायल कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद अदालत ने मामले की आगे जांच का आदेश दिया।
सेनेगल से रवि पुजारी के प्रत्यर्पण के बाद हुई नई जांच में कई गवाहों ने राजन सुजनानी, किशोर वतनानी और रवि पुजारी सिंडिकेट के सदस्यों के खिलाफ बयान दिए।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि लगभग एक दशक की अस्पष्ट देरी के बाद MCOCA लगाया गया। हालांकि अदालत ने सरकारी वकील आशीष सातपुते की इस दलील को स्वीकार किया कि गवाह रवि पुजारी और उसके सहयोगी परशुराम शिंदे के डर के कारण पहले चुप रहे थे।
अदालत ने कहा, “देरी का यह स्पष्टीकरण उचित, विश्वसनीय और एक सामान्य व्यक्ति के व्यवहार को दर्शाने वाला है।”
अदालत ने MCOCA लागू करने के लिए दी गई मंजूरी को भी सही ठहराया और कहा कि कथित अपराध व्यापारियों में भय पैदा करने तथा संगठित अपराध सिंडिकेट के लिए आर्थिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से किया गया था।
हालांकि खंडपीठ ने आरोपी मंगेश सावंत को राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि मूल FIR में ऐसा कोई आरोप नहीं था जो उन्हें कथित वसूली वाले फोन कॉल से जोड़ता हो।
अंततः अदालत ने राजन सुजनानी और किशोर वतनानी की याचिकाएं खारिज कर दीं।
