बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा उसके पूर्व मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई कई विभागीय जांचों पर रोक लगा दी। ये जांच उन दो मामलों में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू की गई थीं, जिनकी निगरानी समीर वानखेड़े ने की थी। न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल काथा की खंडपीठ ने गुमनाम शिकायतों और आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने पर NCB से सवाल किया। अदालत ने कहा कि यदि इस तरह की शिकायतों पर जांच शुरू की जाएगी तो जांच अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से डरने लगेंगे।
न्यायधीशद्वय ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल काथा ने कहा- ऐसी कार्रवाई ईमानदारी से अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले अधिकारियों का मनोबल गिराएगी और एक खतरनाक एवं अवांछनीय मिसाल कायम करेगी, जिससे आरोपी केवल इसलिए जांच अधिकारियों को निशाना बना सकेंगे क्योंकि उन्होंने अपने वैधानिक दायित्व निभाए हैं।
2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े ने वर्ष 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर NCB द्वारा पूछताछ के लिए जारी समन को चुनौती दी थी। यह समन उन गुमनाम शिकायतों के आधार पर जारी किया गया था, जिनमें दो मामलों की जांच में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इनमें से एक मामला अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से जुड़ा था। ये शिकायतें उस गुमनाम पत्र पर आधारित थीं, जो वर्ष 2021 में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक को मिला था। एक मामला नाइजीरियाई ड्रग तस्कर की गिरफ्तारी में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला ब्रिटेन में रहने वाली अभिनेत्री सपना पब्बी से संबंधित कथित ड्रग प्रकरण का था। सपना पब्बी ने वर्ष 2019 की फिल्म ड्राइव में सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम किया था।
समीर वानखेड़े, जो अब धुरंधर के रूप में जाने जाते हैं, ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि NCB के मुंबई जोनल निदेशक रहते हुए नवाब मलिक लगातार उन्हें निशाना बनाते रहे, विशेषकर तब जब कथित मादक पदार्थ रखने के मामले में नवाब मलिक के दामाद समीर खान को उन्होंने गिरफ्तार किया था।
नवंबर 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NCB को नवाब मलिक को मिले गुमनाम पत्र की जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद नवंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच NCB ने समीर वानखेड़े को 11 नोटिस जारी किए, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने दावा किया कि NCB उन्हें निशाना बना रही है और यह जांच उनके खिलाफ “प्रतिशोध की कार्रवाई” है।
गुरुवार को न्यायधीशद्वय ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल काथा ने समीर वानखेड़े की याचिका स्वीकार करते हुए NCB को निर्देश दिया कि मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय होने तक उन्हें पूछताछ के लिए तलब न किया जाए। न्यायधीशद्वय ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल काथा ने कहा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बार-बार की जा रही कार्रवाई “स्पष्ट उत्पीड़न” है। न्यायधीशद्वय ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल काथा ने यह भी कहा कि यदि जांच एजेंसियां आरोपियों द्वारा जांच अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों को आसानी से स्वीकार करने लगेंगी तो इससे आपराधिक न्याय व्यवस्था में अराजकता फैल जाएगी।
न्यायधीशद्वय ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल काथा ने कहा- यदि जांच या उससे जुड़े किसी पहलू को लेकर कोई शिकायत थी, तो उसे रिमांड के समय उठाया जाना चाहिए था, जबकि इन मामलों में ऐसा नहीं किया गया। इससे पहले अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान समीर वानखेड़े की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव चव्हाण तथा अधिवक्ता फैज मर्चेंट और फैसल शेख ने दलील दी थी कि NCB के नोटिसों में यह उल्लेख नहीं था कि उन्हें किस कानूनी प्रावधान के तहत जारी किया गया है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि शिकायतकर्ता स्वयं उन दो अलग-अलग मामलों के आरोपी हैं, जिनकी निगरानी समीर वानखेड़े ने की थी। उनका कहना था कि NCB की जांच “महज दिखावा” है और एजेंसी द्वारा अदालत में दिए गए तर्क “सफेद झूठ” हैं।
समीर वानखेड़े वर्ष 2021 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने क्रूज़ शिप ड्रग्स मामले की जांच का नेतृत्व किया था। उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया था।

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