महिला श्रद्धालुओं से बदसलूकी पर लालबागचा राजा मंडल पर मानवाधिकार आयोग सख्त, पुलिस को लगाई फटकार!

 

मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल में श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार का मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पुलिस प्रशासन और अन्य प्रतिवादियों को कड़ी फटकार लगाते हुए श्रद्धालुओं के मानवाधिकार और सम्मान की रक्षा को लेकर गंभीर नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान मंडल के स्वयंसेवकों पर श्रद्धालुओं के साथ बदसलूकी और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए। खासतौर पर महिला श्रद्धालुओं के साथ अनुचित व्यवहार का मुद्दा आयोग के सामने प्रमुखता से उठाया गया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाया। पुलिस की ओर से भोईवाड़ा विभाग के एसीपी घनश्याम पलंगे उपस्थित रहे, जबकि लालबागचा राजा मंडल की ओर से एक वकील ने पक्ष रखा।

शिकायतकर्ता की ओर से मुंबई हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशीष राय, पंकजकुमार मिश्रा और प्राची पांडे ने अपना पक्ष रखा।

सुनवाई में महानगरपालिका की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव या गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव की ओर से भी कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। संबंधित अधिकारियों और विभागों की गैरहाजिरी को लेकर अगली सुनवाई में सवाल उठने की संभावना है।

मानवाधिकार आयोग ने मामले को अब 6 अक्टूबर 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए रखा है। इस दौरान श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार, पुलिस-प्रशासन की भूमिका और उनकी सुरक्षा एवं गरिमा से जुड़े मुद्दों पर अहम सुनवाई होने की उम्मीद है।

लालबागचा राजा के दर्शन के लिए गणेशोत्सव के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मानवाधिकार आयोग की सख्त टिप्पणियां आने वाले समय में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सम्मान और दर्शन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

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