मुंबई की एक सत्र अदालत ने मलबार हिल निवासी 39 वर्षीय ज्योतिषी राजशेखर शास्त्री की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। राजशेखर शास्त्री पर पूजा-पाठ के जरिए एक महिला की कैंसर से पीड़ित बहन को ठीक करने का भरोसा देकर उससे 69.30 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। राजशेखर शास्त्री के खिलाफ गोवंडी में एक अन्य परिवार से 93.47 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज है।
राजशेखर शास्त्री को गिरफ्तारी से राहत देने से इन्कार करते हुए सत्र अदालत ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता से ली गई रकम पेशेवर सेवाओं के शुल्क के रूप में प्राप्त की गई थी।
अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि धोखाधड़ी की कुल रकम 69.30 लाख रुपये है, जो बहुत ज्यादा है। इतनी बड़ी रकम पेशेवर सेवाओं के लिए नहीं हो सकती।”
जयंती गोपालकृष्णन की शिकायत पर तिलक नगर पुलिस स्टेशन में राजशेखर शास्त्री के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जयंती गोपालकृष्णन के अनुसार, वह अपने भाई आदित्यनाथ उर्फ बाबू गुरुजी के साथ राजशेखर शास्त्री के पास गई थीं। उनका कार्यालय तिलक नगर में स्थित था।
जयंती गोपालकृष्णन ने बताया कि वह कैंसर से पीड़ित अपनी बहन की बीमारी को लेकर चिंतित थीं। इस दौरान आरोपियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे पूजा-पाठ के जरिए उनकी बहन को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं।
FIR के मुताबिक, जून 2025 से जून 2026 के बीच राजशेखर शास्त्री ने पूजा कराने के नाम पर महिला से कुल 69.30 लाख रुपये लिए। इस रकम में सोने के गहने भी शामिल थे।
जयंती गोपालकृष्णन का आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद उनकी बहन ठीक नहीं हुई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूजा के बाद सोने के गहने लौटाने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें वापस नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
राजशेखर शास्त्री ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए दावा किया कि जयंती गोपालकृष्णन से प्राप्त रकम ज्योतिष संबंधी पेशेवर सेवाओं और परामर्श के लिए थी। उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से ज्योतिष का काम कर रहे हैं और उनका स्थापित व्यवसाय है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जयंती गोपालकृष्णन को धोखा देने के लिए उनकी कोई बेईमान या धोखाधड़ी करने की मंशा नहीं थी।
सरकारी वकील पंकज चव्हाण ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस की ओर से नोटिस दिए जाने के बावजूद दोनों भाई जांच में शामिल नहीं हुए।
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों भाइयों ने न तो रकम लौटाई और न ही जांच में सहयोग किया। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने अपना ज्योतिष संबंधी कारोबार बंद कर दिया था।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों भाइयों के खिलाफ इसी तरह का एक अन्य मामला भी दर्ज है। आरोप है कि उन्होंने एक कारोबारी की दिवंगत पत्नी की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने के बहाने उससे 93.47 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों का पता लगाने के साथ-साथ सोने के गहनों का क्या किया गया, यह जानने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना जरूरी है।
