गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के विशेष हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘दो सौ खोली’ में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके पूर्व लॉरेंस बिश्नोई ‘दस खोली’ में रखा गया था। यह अपेक्षाकृत छोटा हाई-सिक्योरिटी परिसर है, जिसमें करीब 10 कैदियों को रखने की व्यवस्था है। इससे पहले लॉरेंस बिश्नोई दिल्ली की तिहाड़ जेल और पंजाब की विभिन्न जेलों में भी रह चुका है।
फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले की जांच के सिलसिले में सामने आए व्यापक नेटवर्क से जुड़ी रिपोर्टों में अनिल पंडित का नाम भी आया है। पुलिस उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन पर फायरआर्म्स और कारतूसों का इंतजाम करने तथा हमले में शामिल लोगों की मदद करने का संदेह है। लॉरेंस बिश्नोई का इस घटना से कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच का विषय है।
‘दो सौ खोली’, जिसे ‘ब्लॉक 200’ भी कहा जाता है, साबरमती सेंट्रल जेल का अधिकतम सुरक्षा वाला हिस्सा है। यहां आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी या दोषी करीब 200 कैदियों को रखा जाता है। इस ब्लॉक में 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के दोषी भी बंद हैं। कैदियों की आवाजाही और आपसी संपर्क सीमित रखने के लिए इसे चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। प्रत्येक हिस्से में लगभग 50 कैदी रखे जाते हैं। लॉरेंस बिश्नोई की कोठरी करीब 7.5 फीट लंबी और 11 फीट चौड़ी है।
पुलिस को पिछले दो वर्षों में बिश्नोई की ओर से किए गए किसी सीधे फोन कॉल या संचार का पता नहीं चला है। यह स्थिति पहले के वर्षों से अलग है, जब विभिन्न जेलों में बंद रहने के दौरान उसके नाम से धमकी भरे फोन कॉल, ऑडियो और वीडियो संदेश तथा इंटरव्यू सामने आते रहे थे। अधिकारियों ने जेल के भीतर से अपने सहयोगियों के साथ संपर्क करने और कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने की उसकी क्षमता सीमित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
यह भी बताया जाता है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल की कोठरी में अनुशासित दिनचर्या का पालन करता है। वह ध्यान लगाने, हनुमान चालीसा का पाठ करने, उपवास रखने और शाकाहारी भोजन करने में समय बिताता है।
