मध्य मुंबई के कालाचौकी में पुनर्विकास परियोजना को 18 साल तक लटकाने वाले बिल्डर को राहत देने से इन्कार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि मुंबई में अपना घर होने के साथ लोगों की भावनाएं और उम्मीदें जुड़ी होती हैं। बिल्डरों को घर से जुड़ी इन आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने सोमवार को पारित अपने आदेश में कहा, “मुंबई में घर खरीदने के लिए लगाई गई मेहनत की कमाई के अलावा, लोगों की भावनाएं और संवेदनाएं भी इससे जुड़ी होती हैं। अपने सपनों के शहर में घर होने से जुड़ी इन भावनाओं को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता।”
अदालत ने आगे कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बिल्डरों पर कानून के तहत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुनर्विकास योजना या किसी अन्य व्यवस्था के तहत फ्लैटों का कब्जा समय पर सौंपा जाए।
अदालत बिल्डर ओम शांति प्रॉपर्टीज (ओएसपी) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने कालाचौकी स्थित परिजात को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के पुनर्विकास का काम अपने हाथ में लिया था। इस सोसाइटी में 181 सदस्य हैं।
ओएसपी ने सोसाइटी की ओर से 11 फरवरी 2025 को जारी अनुबंध समाप्ति के नोटिस को चुनौती दी थी। बिल्डर ने अदालत से इस नोटिस को रद्द करने और उस पुनर्विकास परियोजना को बहाल करने की मांग की थी, जिसे उसने वर्ष 2008 में सोसाइटी के अधिकांश सदस्यों की सहमति से हासिल किया था।
31 मार्च 2008 को ओएसपी के तत्कालीन साझेदारों को परिजात हाउसिंग सोसाइटी के पुनर्विकास के लिए डेवलपर नियुक्त किया गया था। सोसाइटी में दो इमारतें, एक चॉल, 19 गैरेज, दो मंदिर, एक जिम और दो गोदाम शामिल थे।
बिल्डर की निष्क्रियता को लेकर वर्ष 2017 में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके बाद 16 जुलाई 2018 को पुनर्विकास अनुबंध समाप्त कर दिया गया। फरवरी 2019 में बिल्डर की ओर से 27.68 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि का भुगतान किए जाने के बाद बीएमसी ने ओएसपी को परियोजना दोबारा शुरू करने की अनुमति दी। अदालत को बताया गया कि बिल्डर ने सहमति दी थी कि यदि परियोजना 2022 तक पूरी नहीं होती है, तो वह इसे समाप्त कर देगा।
वर्ष 2020 के बाद भी परियोजना में कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके बाद बीएमसी ने बिल्डर को जारी आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) समाप्त करने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
जून 2024 में ओएसपी ने सोसाइटी के सदस्यों के साथ स्थायी वैकल्पिक आवास समझौता किया। हालांकि, वर्ष 2025 में सोसाइटी ने विकास समझौता समाप्त कर दिया और नए बिल्डर का चयन करने की मंशा जाहिर की। इसके बाद सोसाइटी ने इसी साल सितंबर में एक नए बिल्डर को नियुक्त कर दिया।
ओएसपी ने अदालत में दलील दी कि परियोजना में हुई देरी के लिए केवल उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी के मुताबिक, परियोजना को लागू करने की प्रक्रिया सोसाइटी और बीएमसी से जुड़े कई चरणों पर निर्भर थी।
इसके विपरीत, सोसाइटी ने अदालत को बताया कि बिल्डर लगभग दो दशकों तक परियोजना को आगे बढ़ाने में विफल रहा। सोसाइटी ने यह भी कहा कि 27 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बिल्डर की बार-बार की गई चूकों के कारण करना पड़ा था। इस भुगतान से बिल्डर को परियोजना में कोई विशेष अधिकार या हक प्राप्त नहीं हो जाता।
