प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय-I ने बुधवार को नवीन चिचकर के ड्रग सिंडिकेट से जुड़े मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुंबई और गुजरात में करीब 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस तलाशी अभियान में कई आपत्तिजनक सामग्री, डिजिटल उपकरण और ड्रग्स से अर्जित रकम की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत बरामद किए गए हैं।
ED के सूत्रों के मुताबिक, नवीन चिचकर और उसके सहयोगियों के एक स्थापित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने ड्रग्स की बिक्री से अपराध की कमाई अर्जित की। इसमें कोकीन, हाइड्रोपोनिक कैनाबिस, एलएसडी और कैनाबिस से बने खाद्य पदार्थों की बिक्री शामिल थी। इनमें से ज्यादातर नशीले पदार्थों की तस्करी भारत के बाहर से की जाती थी।
ED के अनुसार, नवीन चिचकर और अन्य आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत जांच मुंबई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और नवी मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) द्वारा दर्ज मामलों के आधार पर शुरू की गई थी। इन मामलों में मुंबई और नवी मुंबई में उच्च गुणवत्ता वाले हाइड्रोपोनिक कैनाबिस (गांजा), कोकीन और बेहिसाब नकदी की बड़ी मात्रा जब्त की गई थी।
एक अधिकारी ने बताया, “जांच के दौरान पता चला है कि नवीन चिचकर ने अपराध से अर्जित धन का एक बड़ा हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है। यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की बिक्री से प्राप्त रकम सीधे हवाला ऑपरेटरों के पास जमा की जाती थी। इसके बाद ये ऑपरेटर नवीन चिचकर को USDT या थाई बहत में भुगतान करते थे।”
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ड्रग्स की बिक्री से प्राप्त रकम भारत से बाहर भेजी। तलाशी के दौरान इस लेन-देन की पुष्टि करने वाले सबूत भी मिले हैं।
सितंबर 2025 में ED ने नवीन चिचकर के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के संबंध में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी।
30 वर्षीय नवीन चिचकर ने लंदन से फिल्म निर्माण की पढ़ाई की है और उसकी पृष्ठभूमि आपराधिक मनोविज्ञान से भी जुड़ी बताई जाती है। उस पर 200 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामदगी से जुड़े मामले में आरोपी होने का आरोप है। साथ ही, उस पर एक अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क संचालित करने का आरोप है, जिसके जरिए पिछले कुछ वर्षों में अनुमानित 1,128 करोड़ रुपये की ड्रग्स भारत में तस्करी करके लाई गईं।
नवीन चिचकर को मई 2025 में मलेशिया से भारत निर्वासित किया गया था। वहीं, सिंडिकेट के वित्तीय कामकाज को संभालने का आरोप झेल रहे उसके छोटे भाई धीरज चिचकर को 15 अगस्त को भारत लाया गया था। दोनों को NCB की ओर से जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद भारत वापस लाया गया।
