बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महिला के देवर और ननद को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत लगाए गए आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि कथित घटना से पहले महिला ने इस्लाम धर्म अपना लिया था, इसलिए कानून की दृष्टि में उसकी अनुसूचित जाति की स्थिति “अप्रभावी (eclipsed)” हो गई थी। हालांकि, अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज अपराधों—जैसे मारपीट और अवैध रूप से घर में प्रवेश—के मामले में मुकदमे का सामना करने का निर्देश…
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