महाराष्ट्र राज्य सहकारी अपीलीय न्यायालय ने कहा है कि साझा जगहों पर अवैध कब्जे को संरक्षण देने या गैरकानूनी काम को जारी रखने के लिए न्यायिक कार्यवाही और निषेधाज्ञा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोहराया कि किसी संपत्ति पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति उसके वैध मालिक के खिलाफ संरक्षण की मांग नहीं कर सकता। अदालत ने वर्ली स्थित शाह एंड नाहर इंडस्ट्रियल प्रिमाइसेस को-ऑपरेटिव सोसाइटी में एक औद्योगिक इकाई से लगे 2,360 वर्ग फुट के टेरेस को लेकर वर्ष 1999 से चल रहे विवाद में अपील…
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