दिगंबर जैन मुनि श्रुतसागर ने 13 जून को शाम 5:25 बजे जैन धर्म की पवित्र साधना यम संलेखना का पालन पूर्ण किया। इसके साथ ही शिक्षा, उद्यमिता, आध्यात्मिक अनुशासन, वैराग्य और जैन धर्म की सेवा से परिपूर्ण उनके दीर्घ जीवन का समापन हुआ। जैन समाज के लोगों ने मुनि श्रुतसागर को एक अत्यंत चिंतनशील साधु के रूप में याद किया है, जिनका जीवन वैराग्य, अनुशासन और धर्म के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक था। उनके निधन पर श्रद्धालुओं, शिष्यों और परिवारजनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुनि श्रुतसागर…
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