महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने बुधवार को सोलापुर ITI धर्मांतरण मामले और तालेगांव दाभाडे में एक स्पेनिश कंपनी से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में कथित रूप से शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अपने एक्स अकाउंट पर देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि मामलों में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के खिलाफ जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में कथित तौर पर ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संस्थान की 150 छात्राओं और 9 हिंदू कर्मचारियों के साथ शारीरिक, मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न किए जाने का खुलासा हुआ है। इस संबंध में कर्मचारियों ने 27 मार्च 2026 को कौशल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
संस्थान की मुस्लिम ग्रुप इंस्ट्रक्टर रमीजा काम्पली ने नियमों का उल्लंघन करते हुए रुखसार शेख नामक महिला को प्रति घंटे के आधार पर नियुक्त किया। आरोप है कि रुखसार शेख छात्राओं को अत्यंत भड़काऊ और विकृत बातें सिखाती थीं, जैसे— “प्रेम करो, और यदि माता-पिता शादी की अनुमति न दें तो अपनी कलाई काट लो।” छात्राओं ने स्वयं मीडिया के सामने रोते हुए बताया कि कॉलेज में प्रेम संबंधों पर ऐसी बातें सिखाई जाती थीं। इसके अलावा रमीजा काम्पली पर हिंदू छात्राओं के नाम विभिन्न लड़कों के साथ जोड़कर उन्हें बदनाम करने का आरोप है। आरोप यह भी है कि जिन लड़कों के साथ हिंदू छात्राओं के नाम जोड़े गए, उनमें अधिकांश मुस्लिम थे।
इस संदर्भ में ‘सकल हिंदू समाज’ ने उच्चस्तरीय मुख्य कार्यालय जांच समिति की अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा है।
संस्थान के भीतर अत्यंत विषाक्त धार्मिक माहौल बना दिया गया था। पार्लर ट्रेड की एक छात्रा ने बुखार के कारण छुट्टी मांगी तो उसके कुमकुम का मजाक उड़ाते हुए कहा गया— “तुम कुमकुम लगाती हो, तुम्हें बीमारी कैसे हो सकती है?” इस टिप्पणी को हिंदू विरोधी और अपमानजनक बताया गया। छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान शौचालय न जाना पड़े, इसके लिए “कम पानी पियो” जैसी अमानवीय सलाह दी गई। यह भी आरोप है कि रमीजा काम्पली मुस्लिम छात्राओं को हिंदू शिक्षकों के खिलाफ भड़काती थीं।
हिंदू कर्मचारियों को जानबूझकर परेशान कर पदों से हटाया गया और उनकी जगह बिना विज्ञापन और अनुभव के मुस्लिम समुदाय के लोगों की अवैध नियुक्तियाँ की गईं।
स्थायी कर्मचारी स्वाती पुकले को प्रताड़ित कर बाहर किया गया। टी.डब्ल्यू.पी.टी. (टेक्सटाइल वेट प्रोसेसिंग टेक्नीशियन) शाखा का पद खाली होते ही बिना विज्ञापन और अनुभव के नाहिद शेख की नियुक्ति की गई। फल एवं सब्जी ट्रेड में भी अनुभव न होने के बावजूद अलमास शेख को नियुक्त किया गया।
घंटे के आधार पर नियुक्त कर्मचारी तमन्ना शेख 5 महीने तक अनुपस्थित रहीं, फिर भी उन 5 महीनों तक छात्रों को संबंधित विषय नहीं पढ़ाया गया ताकि वहाँ किसी हिंदू व्यक्ति की नियुक्ति न हो सके और बाद में उस पद पर भी मुस्लिम व्यक्ति को नियुक्त कर दिया गया।
प्रवेश प्रभारी होने का लाभ उठाते हुए रमीजा काम्पली ने हिंदू छात्राओं को प्रवेश संबंधी पूरी जानकारी नहीं दी, जबकि मुस्लिम छात्राओं को प्राथमिकता दी गई और उन्हें श्री आरिफ शेख की कक्षा में अलग बैठाकर पढ़ाया गया।
कर्मचारियों के बिलों पर हस्ताक्षर करने के लिए रमीजा द्वारा हर महीने 1,000 रुपये रिश्वत मांगे जाने का आरोप है।
सरकार द्वारा प्रैक्टिकल के लिए कच्चा माल मुफ्त उपलब्ध कराने के बावजूद रमीजा और अन्य मुस्लिम कर्मचारियों ने छात्राओं पर बाजार से अधिक कीमत पर यूनिफॉर्म का कपड़ा और सिलाई सामग्री खरीदने का दबाव बनाया।
सफाई कर्मचारी अर्चना जाधव को हटाकर जाकिर सुलेमान की नियुक्ति की गई। विरोध के बाद अर्चना जाधव को वापस लिया गया, लेकिन अब उन्हें गंभीर मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
बदलापुर घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने महिला कॉलेजों और स्कूलों के शौचालयों की सफाई के लिए केवल महिला सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था। इसके बावजूद एक हिंदू महिला सफाई कर्मचारी को हटाकर छात्राओं के संस्थान में एक मुस्लिम पुरुष को सफाईकर्मी नियुक्त किया गया। इसे छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर और प्रशासनिक लापरवाही का मामला बताया गया है।
आरोप है कि रमीजा काम्पली हर महीने 4 दिन तक शैक्षणिक कार्य रोककर 150 छात्राओं से जबरन झाड़ू लगवाना, पोछा लगवाना और झाड़ियाँ कटवाने जैसे कठिन श्रम करवाती थीं। इस दौरान कई छात्राएँ घायल हुईं और बेहोश भी हुईं। विरोध करने वाली छात्राओं का उनके घर तक पीछा कर धमकाने का आरोप भी लगाया गया।
जब तत्कालीन प्राचार्य अमर जाधव ने इन कथित अवैध गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया तो आरोप है कि रमीजा काम्पली के पति ने उन्हें जान से मारने और ट्रक चढ़ाने की धमकी दी, जिसके कारण उन्हें संस्थान छोड़ना पड़ा। अब आवाज उठाने वाली छात्राओं पर भी मुकदमे की धमकी देकर दबाव बनाया जा रहा है।
